कितनी बडी पॉलिसी ग्राहक को दें

किसी ग्राहक को उसकी फाइनेंशियल कैपेसिटी से छोटी पॉलिसी देना(बेचना) ग्राहक और एजेंट दोनों के लिए गुनाह है। ग्राहक के लिए तो इसलिए कि उसे जरूरत से छोटी पॉलिसी मिली और आपके लिए नुकसान यह है कि आपको इस पॉलिसी से कमीशन कम मिलेगा। इसी तरह अगर ग्राहक को उसकी क्षमता से बड़ी पॉलिसी बेची गई होती तो नुकसान यह होगा कि पॉलिसी बंद हो सकती है, जो दोनों के लिए ही हानिकारक होगा। 

मैंने जब बीमा एजेंसी ली तो एक परिचित के पास भी में के लिए गया उसने बताया कि उसका पॉलिसी खरीदने से का पहला अनुभव बहुत कटु रहा था उसकी किसी पड़ोसी नहीं जैसी ली थी और उसे बीमा के लिए मिला इस भाई ने उससे यह कह दिया कि मैं ₹8000 सालाना की किस्त दे सकता हूं तुम जो भी पॉलिसी ठीक समझते हो कर दो पॉलिसी बन कर आ गई और इसने उठाकर अलमारी में रख दी जब अगले साल कष्ट के लिए कंपनी का नोटिस आया तो वह ₹16000 का था इसने उस एजेंट से बात की तो उसने बताया कि उसने पहले से ही 16000 साल आना की पॉलिसी बनाई थी जिसमें ₹8000 अपनी और से कमीशन के मिलाकर डाल दिए थे ग्राहक 16000 साल आना नहीं दे सकता था तो पॉलिसी बंद हो गई और दोनों का ही नुकसान हुआ इसलिए जरूरी है कि ग्राहक को उसकी क्षमता अनुसार ही पॉलिसी बेची जाए ना जरूरत से कम और ना ज्यादा इसके लिए पहली जरूरत जरूरी बात है वह यह कि आप ग्राहक के सामने ठीक सा इसका उदाहरण लें जब मैंने बीमा एजेंसी ली तो पहले साल में मेरा औसत प्रीमियम था ₹6000 प्रति पॉलिसी मैंने जब विचार किया तो एहसास हुआ कि ग्राहक दे तो ज्यादा भी सकता है परंतु मैं उदाहरण ही एक लाख बीमा धन की पॉलिसी काट लेता हूं ऐसा मैं इसलिए करता था क्योंकि जब मुझे पॉलिसी सिखाई गई थी तो एक लाख के उदाहरण से ही बताई गई थी और मैंने उसी को अपनी आदत बना लिया इसके बाद मैंने 200000 की पॉलिसी का उदाहरण लेना शुरू किया तो बिजनेस पढ़ने लगा अब या तो ग्राहक 200000 की पॉलिसी ले लेता या बोलता कि 12000 की किस्त थोड़ी ज्यादा है इससे औसत प्रीमियम 8 से 9000 के बीच हो गया 2011 2012 के समय के हिसाब से यह राशि कम नहीं थी इसलिए ठीक सा इसका उदाहरण लिए इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक एक लाख की पॉलिसी का उदाहरण देखें और 500000 की पॉलिसी खरीद ल बहुत छोटी पॉलिसी बेच कर आ जाते हैं क्योंकि वे उसकी क्षमता का ठीक से आकलन नहीं कर पाते ग्राहक का सही मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है एक भारतीय आदमी जापान में गया वह वहां के एक अत्यधिक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की प्रयोगशाला देखने चला जाता है उसने वैज्ञानिक से कहा कि कोई नई चीज दिखाएं वैज्ञानिक ने अपनी मुट्ठी बंद की और बोला बताओ इसमें क्या है उस भारतीय ने आसपास निगाह घुमा कर देखा तो पाया कि कुछ टेलीविजन के मॉडल और फोटोग्राफ रखे थे उसे लगा कि इस जापानी ने कोई छोटी छोटा टीवी बना लिया लगता है जो उसकी मुट्ठी में बंद कर लिया है उसने कहा मुट्ठी में टीवी है वैज्ञानिक बोला बिल्कुल ठीक अब बताओ कितने एमडीआरटी दिल्ली की मीटिंग में एक एजेंट ने बताया कि वह किसी ग्रह के पास गया और उसे अपनी पॉलिसी बताई उसकी बात से संतुष्ट होने पर ग्राहक ने कहा एक लाख की दे दो उस एजेंट है उसे एक लाख की बीमा राशि की पॉलिसी जिसका प्रेम ₹6000 था दे दी पॉलिसी लेने के बाद ग्राहक ने कहा कि वह एक लाख का प्रीमियम देना चाहता था पर एजेंट ने उसकी हैसियत का मूल्यांकन 6000 के प्रीमियम के बराबर ही किया तो उसे इतना ही प्रीमियम दिया सबसे बढ़िया तरीका ग्राहक की क्षमता का अनुमान लगाने का कि आप उससे पूछा कि आपको इस प्लान में लगभग कितनी मेच्योरिटी वैल्यू चाहिए इस बात की संभावना कम है कि कोई ग्राहक आपको यह बोले कि उसे 15 साल के बाद ₹100000 ही चाहिए जब आप प्रेम की बात करते हैं तो उसे लगता है कि यह तो पैसा मांग रहे हैं इसलिए चौकन्ना रहता है जब आप मैच्योरिटी की बात करते हैं तो आप उसे पैसा देने की बात कर रहे हैं इसलिए मैं ज्यादा सहज रहता है ग्राहक आपको बोलता है कि 15 साल के बाद लगभग 1500000 रुपए तो मिलना ही चाहिए अब हम ग्राहक से कहेंगे कि आपने बिल्कुल ठीक अनुमान लगाया 1500000 तो मिलना ही चाहिए यदि आप ₹1000000 की पॉलिसी लेते हैं तो आपको लगभग 1500000 मिलेगा 1000000 के लिए आप की किस्त बनेगी लगभग ₹5000 महीना यदि आप सीधे ₹60000 सालाना की बात करते तो उसके लिए इसे स्वीकार करना कठिन हो सकता था पर अब आप जिस तरीके से समझा रहे हैं यह एक बेहतर तरीका है उसे अपनी बात समझाने का।

कितना रिस्क कवर चाहिए

जब हम ग्राहक से यह कहते हैं कि आपकी पुरानी पॉलिसी आपकी फाइनैंशल प्लानिंग का हिस्सा नहीं है तो ग्राहक हम से कह सकता है कि चलिए अब आप बताएं कि मुझे कितने का बीमा लेना चाहिए आप मेरी फाइनैंशल प्लानिंग करें क्या आप जानते हैं कि किसी आदमी का कितना बीमा होना चाहिए एक प्रोफेशनल तरीके से इसे कैसे जुड़ेंगे अक्सर हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब यह सवाल एजेंटों से पूछा जाता है तो एक एजेंट बोलता है सालाना आमदनी का 10 गुना तो दूसरा बोलता है ढाई सौ गुना दोनों एजेंट ठीक नहीं हो सकते हैं इसका अर्थ है कि लोगों की समझ में कहीं ना कहीं कमी है एक सिद्धांत आता है ह्यूमन लाइफ वैल्यू का जिसमें यह गणना की जाती है कि यह आदमी अपने जीवन में कुल कितना धन कम आएगा और इसे उतना ही बीमा देना चाहिए इस सिद्धांत में समस्या यह है कि यह अनुमान लगाना संभव ही नहीं है कि आदमी अगले 20 साल में कितनी तरक्की करेगा कितना सफल होगा कितना कम आएगा इसलिए यह सिद्धांत व्यवहारिक नहीं है दूसरा सिद्धांत है इनकम रिप्लेसमेंट का यानी यह आदमी सालाना कितना कमाता है और इसे उतना ही बीमा दिया जाए जिससे इसके जाने के बाद परिवार का पहले जैसा स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बना रहे यानी उन्हें घर खर्च के लिए पहले जैसी आमदनी उपलब्ध रहे यह ज्यादा व्यवहारिक है क्योंकि इसकी गणना संभव है हम किसी आदमी को उतना ही बीमा देंगे जिससे कि उसके ना रहने पर परिवार को उसकी वर्तमान आमदनी के बराबर मासिक आमदनी मिल सके इसकी गणना इस प्रकार से करेंगे कि सालाना आमदनी का 12 गुना बीमा कर दें यदि एक आदमी साल में तीन तीन लाख कमाता है तो उसे हमें हम 36 लाख का बीमा देंगे अब यदि परिवार का मुखिया चल बसे तो परिवार को 3600000 का जो क्लेम मिलेगा उसे किसी भी सुरक्षित जगह पर जमा करवाने से जहां 8% का ब्याज मिले तीन लाख सालाना की आमदनी हो जाएगी इससे परिवार को वह सब साधन मिलते रहेंगे जो आज मिल रहे हैं यदि परिवार पर कोई कर्ज है जैसे मकान या कार का लोन तो उसे भी 3600000 में जोड़ देंगे ताकि उसे चुकाने के बाद परिवार 3600000 निवेश कर सके कहा तो यह जाता है कि सालाना आमदनी में से ग्राहक का व्यक्तिगत खर्च जैसे सिगरेट शराब आदि घटाकर उसका 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि ग्राहक के जाने के बाद इस खर्च की जरूरत नहीं होगी मेरा मानना यह है कि हमें व्यक्तिगत खर्च घटाएं बिना ही 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि घर खर्च हर साल बढ़ता रहेगा जबकि ब्याज से होने वाली आमदनी स्थिर रहेगी इसलिए थोड़ा ज्यादा बीमा क्लेम ही चाहिए यदि ग्राहक अपनी आमदनी बताने को राजी ना हो तो हम उससे उसका मासिक खर्च पूछेंगे जो कि ग्राहक आसानी से बता देता है ऐसी अवस्था में हम आमदनी का 12 गुणा करके खर्च का 12 गुना करेंगे इस प्रकार जोरासी निकले उसमें सारे कर्ज को जोड़ दें तो यह बीमा राशि यार इस कवर की राशि निकल आएगी जो ग्राहक को लेना चाहिए इसे एक उदाहरण से ठीक समझ पाएंगे यदि किसी ग्रह की सालाना खर्च रुपए है तो उसे कितना रिस्क कवर देंगे इस चार लाख की रकम को हम 12 से गुना करेंगे यानी 4800000 का कवर देंगे जिससे आने की स्थिति में परिवार को 8% की दर से ₹400000 सालाना का ब्याज मिल सके अब यदि उसके ऊपर 500000 का कर्ज है तो उसे इस 4800000 में जोड़ देंगे यानी 53 लाख का बीमा देंगे यदि क्लेम आया तो लोन चुकाने के बाद परिवार के पास 4800000 ही बचेंगे यदि उसके पास पहले से ही 300000 की सुरक्षित सेविंग है तो उस रकम को 53 लाख से घटा देंगे यानी 50 लाख का रिस्क कवर चाहिए।
 

बीमा बेचने मे मोबाइल फोन का प्रयोग

जीवन बीमा टेलीफोन पर बेचना असंभव तो नहीं पर बहुत कठिन जरूर है एजेंट को सामान्यता एक पॉलिसी बेचने के लिए तीन बार ग्रह के पास जाना पड़ता है ऐसे में यह संभव नहीं है कि फोन पर ही कोई पॉलिसी खरीद ले फोन पर सिर्फ वही प्लान बिकेंगे बिकने की संभावना है जिनमें ज्यादा समझाने की जरूरत नहीं जैसे टर्म प्लान इसलिए टेलीफोन का प्रयोग हमें सिर्फ अपॉइंटमेंट लेने के लिए करना चाहिए ऐसा अनेक बार देखा गया है कि किसी के पूछने पर हम उसे फोन पर ही पॉलिसी समझाने लगते हैं इसका सीधा सा अर्थ है कि सामने वाला व्यक्ति मिलने से बचना चाहता है ऐसे व्यक्ति को हम फोन पर ही पॉलिसी से संतुष्ट कर के भेज पाएंगे इसकी संभावना बहुत कम है इसलिए प्रयास करें कि फोन पर वह आपको मिलने के लिए समय दें यदि कोई व्यक्ति जानने के लिए ज्यादा ही जिद करे तो उसे मात्र इतना ही बता दें कि मैं सलाह कंपनी से बोल रहा हूं और हमारे पास लगभग सब प्रकार का बीमा है और कोई भी पॉलिसी संबंधित जानकारी केवल आमने-सामने बैठकर उसकी जरूरत समझ कर ही अच्छे से दी जा सकती है यदि और ज्यादा जानना चाहे तो बता दें कि आपके पास एंडोमेंट मनी बैंक चाइल्ड प्लान पेंशन प्लान आदि सब कुछ है यदि कोई ग्राहक कहे कि उससे मिलने का समय ही नहीं है फोन पर ही सारी जानकारी चाहिए तो नम्रता पूर्वक कह दे कि बाद में कभी मुलाकात हो सकती है मेरे विचार से फोन पर पॉलिसी समझाने का प्रयास अपने समय की बर्बादी ही है फोन पर पॉलिसी वही लोग भेज पाते हैं जिनको टेली कॉलिंग की ट्रेनिंग मिली हो जिनका कम्युनिकेशन बहुत अच्छा हो और जो प्रायः इसी तरह से पॉलिसी बेचने का काम करते हो जब अपॉइंटमेंट लेने के लिए ग्राहक को फोन करें तो उसे दोस्त समय का विकल्प दें यदि आप यह पूछते हैं कि मैं आपसे मिलूं या नहीं तो आप ग्राहक को हां या ना कहने का विकल्प दे रहे हैं बेहतर होगा कि आप ग्राहक से पूछे कि मैं आपसे कल शाम को मिलूं या परसों सुबह ऐसी स्थिति में आप उसे दो समय में से एक को चुनने का मौका दे रहे हैं ध्यान रहे कि आप इस तरीके से ना पूछे कि कल शाम को मिलूं या परसो शाम को यदि ग्राहक का काम ऐसा है कि वह हर रोज शाम को व्यस्त ही होता है तो वह आपको कल या परसों क्या कभी भी शाम को नहीं मिल पाएगा इसलिए उसे दो विकल्प अलग-अलग समय के लिए जैसे सुबह और शाम ऐसे ही यदि आप किसी से पूछे कि मैं आपसे इस रविवार को मिलूं या अगले रविवार को तो वह भी उचित नहीं है हो सकता है ग्राहक हर रविवार को मंदिर या गुरुद्वारे में जाता हो और उस दिन मिलना कभी भी संभव ना हो एक बात और ध्यान में रखने की है जब ग्राहक ने हमें मिलने का समय दिया है तब जाने से पहले उसे पुनः फोन ना करें दोबारा फोन करने का अर्थ है कि अपनी पहली की हुई मेहनत पर पानी फेर देना हो सकता है कि जब आप कॉल पर जाने से पहले दोबारा फोन करें तो ग्राहक आपसे कहे कि अरे हां अच्छा किया कि फोन कर लिया दरअसल में एक बच्चे के जन्मदिन पर जाने वाला हूं और आप कल फोन करके बाद में मिलने यदि आप बिना फोन किए पहले से तय किए गए समय पर पहुंच जाएं तो ग्राहक आप से मिलेगा इस बात की संभावना ज्यादा है जो उदाहरण हमने लिया है उसी के आधार पर बात करें तो यह तय है कि यदि ग्राहक को किसी बच्चे के जन्मदिन की पार्टी में जाना है तो मैं उसका अपना बच्चा तो नहीं है यदि अपने घर में किसी के जन्मदिन की पार्टी होती तो उसे 2 दिन पहले भी पता होता जब उसने आपको मिलने का समय दिया यदि किसी पड़ोसी आने परिचित के यहां पार्टी है तो वह उसमें आधा घंटा देरी से भी जा सकता है संभावना है कि यदि आप उसके सामने पहुंच ही गए तो आपसे वह मिलेगा और यदि जाने से पहले दोबारा फोन करेंगे तो डाल देगा बिना दोबारा फोन किए सीधा वहां पहुंच जाने में दिक्कत यह हो सकती है ग्राहकी अपॉइंटमेंट भूल गया है तो घर पर ना मिले मेरा मानना है कि आपको यह रसके उठाना ही चाहिए इसमें हानि की अपेक्षा लाभ की संभावना ज्यादा है यदि ऐसा हुआ कि ग्राहक आपको समय देकर भी नहीं मिला तो संभव है कि अब नरम स्थिति में रहेगा और दोबारा आपको जल्दी ही मिलने का समय देगा और उसके पॉलिसी लेने की संभावना भी बढ़ जाएगी

अंडरराइटिंग (Underwriting)

अंडरराइटिंग का अर्थ होता है ग्राहक के प्रस्ताव को कंपनी द्वारा स्वीकार या अस्वीकार किया जाना ग्राहक पॉलिसी खरीदने के लिए बीमा कंपनी में आवेदन करता है और कंपनी उसे पॉलिसी देने या ना देने का निर्णय लेती है अंडरराइटिंग करते समय दो चीजें मुख्यता देखी जाती हैं एक है फाइनेंस सिलेंडर राइटिंग और दूसरी है मेडिकल अंडरराइटिंग फाइनेंसियल अंडरराइटिंग का अर्थ है कि कंपनी इस बात को तय करें कि ग्राहक की आर्थिक स्थिति ऐसी है भी या नहीं कि उसे इतना बीमा दिया जा सके बीमा कभी भी लाभ के लिए प्रयोग नहीं हो सकता है यह सिर्फ नुकसान की भरपाई करता है इसे समझने के लिए कार बीमा का उदाहरण लें यदि कार की कीमत 300000 है तो उसका 500000 का बीमा नहीं हो सकता भले ही ग्राहक 500000 के हिसाब से किस्त देने को तैयार हो इसका कारण है कि यदि ऐसा किया गया तो क्लेम आना निश्चित है ग्राहक लाभ कमाने के लिए कभी भी कार को खुद ही नष्ट कर देगा मकान दुकान जहाज कार का बीमा करना हो तो फाइनेंस सिलेंडर राइटिंग आसान है क्योंकि इन चीजों की कीमत की जानकारी प्राप्त करना आसान है जीवन बीमा में यह काम कठिन हो जाता है आप यह नहीं कह सकते कि वह आदमी ₹500000 का है इसलिए आम आदमी की कीमत का अनुमान नहीं लगाते बल्कि उसकी कमाने की क्षमता का अनुमान लगाते हैं आदमी जीते जी जितना कमा रहा है उसके मरने के बाद परिवार को उससे ज्यादा नहीं मिलना चाहिए इसलिए ऐसा संभव नहीं है कि एक आदमी जो ₹20000 महीना कमाता है वह चाहेगी उसका 10000000 रुपए का बीमा हो जाए भले ही वह किस्त पूरी देने को तैयार हो इसलिए किसी ग्रह की आर्थिक स्थिति का अनुमान लगाने के लिए उसकी इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी या अन्य संपत्ति का ब्यौरा चाहिए होता है यह सब कागजात ग्राहक को ही देने होते हैं मैं जब सेल्स में था तो एक बार अपने क्लिक के साथ उसके एक ग्राहक के पास गया उस ग्राहक ने जितने भी में के लिए आवेदन किया था उसके हिसाब से कागजों में उसकी आमदनी बहुत कम थी हमें उसके केस को पुष्ट करने के लिए उसकी इनकम टैक्स रिटर्न के अलावा उसकी संपत्ति के प्रमाण भी चाहिए थे दिल्ली की आजादपुर सब्जी मंडी के इस व्यापारी ने इसका बहुत बुरा माना और तर्क दिया कि पिछले साल ही उसने बैंक में फिक्स डिपॉजिट दिया था उस समय यदि बैंक वालों ने यह सब डिटेल नहीं मांगी तो अब बीमा कंपनी क्यों मांग रही है हमने उसे स्पष्ट शब्दों में समझाएं कि यदि वह कहीं पर भी अपना पैसा सिर्फ ब्याज कमाने के हिसाब से जमा करवाएगा तो बैंक या कोई और संस्था यह सब प्रमाण नहीं मांगेगी अब भी बीमा कंपनी उससे यह कागजात इसलिए नहीं मांग रही कि उसने पैसा जमा करवाया है आया संपत्ति का प्रमाण इसलिए मांगा जा रहा है क्योंकि बहुत थोड़े से प्रीमियम के बदले कंपनी उससे 20 से 25 * रिस्क कवर देने का निर्णय कर रही है अब यदि एक लाख के बदले कंपनी की देनदारी 2000000 की है तो यह सब मांगना और अपने आप को संतुष्ट करना कंपनी का हक है ग्राहक को बात समझ में आ गई और उसने सब कागजात देकर अपनी पॉलिसी जारी करवा ली तो किसी भी तरह की आयत संपत्ति का ब्यौरा मांगना एजेंट के लिए शर्मिंदगी या गुनाह का काम नहीं है यह कैसी आवश्यक जानकारी है जो दुनिया की कोई भी बीमा कंपनी उसे बीमा देते समय मांगेगी यदि ग्राहक को यह समझ में आ जाएगी यह जानकारी उसकी तहकीकात करने के लिए नहीं मांगी जा रही बल्कि हर बीमा कंपनी में यह नियम ही होता है तो उसे यह सब कागजात देते समय हिचक नहीं होगी साथ ही आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि उसकी पॉलिसी में फर्जी कागज लगा दिए जाएं क्योंकि पॉलिसी जारी करने के लिए जो पेपर चाहिए उनसे छूट तो मिल ही नहीं सकती आप कहे कि आप चाहते हैं कि ईमानदारी से पॉलिसी जारी हो इसीलिए सारे पेपर उससे ही मांग रहे हैं कोई भी ग्राहक यह नहीं चाहेगा कि उसकी पॉलिसी फर्जी कागजात के आधार पर बनकर आए

मेडिकल अंडरराइटिंग

मेडिकल अंडरराइटिंग में होती है जब बीमा कंपनी या निर्णय लेती है कि यह आदमी शारीरिक रूप से इस योग्य है कि नहीं कि इसका इतनी रकम का बीमा किया जा सके ऐसा नहीं कि कोई भी व्यक्ति जो किस्त भर सकता है उसका बीमा हो ही जाएगा स्वास्थ्य को जांचने के लिए ग्राहक को डॉक्टर के पास भेजा जाता है अलग-अलग तरह के टेस्ट करवाने के लिए एजेंट के लिए सुविधाजनक स्थिति उस समय होती है जब बीमा पॉलिसी के लिए ग्राहक की डॉक्टरी जांच करवानी होती है अक्सर एजेंट इस मानसिकता से ग्राहक के पास जाता है जैसे कि वह कोई गलत काम कर रहा हो या ग्राहक के साथ धोखाधड़ी कर रहा हो एजेंट को चाहिए कि वह सीधे जाकर साफ तौर से ग्राहक को बताएं कि इस पॉलिसी के लिए उसके मेडिकल चेकअप की जरूरत है यदि ग्राहक यह तर्क दे कि कोई दूसरा एजेंट तो इसके बिना भी पॉलिसी करने को तैयार है तो उसे समझाएं कि मेडिकल टेस्ट करवाने या ना करवाने का निर्णय एजेंट के हाथ में नहीं है बल्कि बीमा कंपनी के नियमों के तहत ही है यदि कोई एजेंट इसके बिना बीमा करने को तैयार है तो इसका यही अर्थ है कि वह नकली मेडिकल रिपोर्ट पॉलिसी के साथ लगा कर भेजेगा अब ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि किसी अनहोनी की स्थिति में उसका क्लेम इस कारण से खारिज हो जाए कि मेडिकल रिपोर्ट सही नहीं थी संभवत कोई भी ग्राहक इसके लिए सहमत नहीं होगा और मेडिकल के लिए मान जाएगा एक दूसरा तरीका ग्राहक को समझाने का यह है कि उससे कहे कि जो भी बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो पूर्ण रूप से स्वस्थ ना होने के बावजूद पॉलिसी लेना चाहते हैं आप तो फिर भी स्वास्थ्य बीमा कंपनी को ऐसे लोगों के लिए मेडिकल का नियम बनाना पड़ता है पर क्योंकि नियम सबके लिए बनते हैं तो आपको भी थोड़ी तकलीफ देनी होगी ग्राहक को यह सुनकर अच्छा लगेगा कि वह तो स्वस्थ है और दूसरे लोगों के लिए बनाए गए नहीं एम के कारण ही उसे मेडिकल करवाना है अब यदि ग्रह की मेडिकल रिपोर्ट ठीक आ जाए तो पॉलिसी तुरंत जारी कर दी जाएगी यदि मेडिकल रिपोर्ट में गड़बड़ दिखाई दी तो ग्राहक आप से यह शिकायत नहीं करेगा कि आपने उसे स्वस्थ बताया था मेडिकल रिपोर्ट के बारे में यह जानना बहुत जरूरी है कि प्राइस तब कंपनियां इस नियम से काम करती हैं कि यह रिपोर्ट उनके पास सीलबंद लिफाफे में ही पहुंचने चाहिए खुली हुई रिपोर्ट मान्य नहीं होती है कुछ कंपनियां यह सुविधा देती है कि यदि ग्राहक चाहे तो पॉलिसी जारी होने के बाद कंपनी से अपने मेडिकल रिपोर्ट की कॉपी मंगवा सकता है यदि रिपोर्ट में कुछ असामान्य हो तो कंपनी सीधे ग्राहक को ना भेजकर रिपोर्ट की कॉपी उसके डॉक्टर को भेज सकती है एक बात और ध्यान देने योग्य है कि यदि किसी ग्राहक से बीमा कंपनी मेडिकल जांच की मांग करती है और वह ग्राहक चाहे कि उसका बीमा कम कर दिया जाए जिससे उसे मेडिकल जांच ना करवानी पड़े तो ऐसा संभव नहीं है यदि एक बार मेडिकल जांच की मांग कर ली गई तो फिर वह ग्राहक इतना भी छोटा बीमा करवाना चाहिये बजाज तो करवानी ही पड़ेगी बीमा कंपनी को यह अधिकार है कि वह नॉन मेडिकल लिमिट वाले क्ति से भी मेडिकल मांग कर सकती है कंपनी के ऐसा करने का कारण अक्सर यह रहता है कि फॉर्म में लिखी ग्राहक की ऊंचाई और वजन में अनुपात असामान्य है या कोई ऐसी पारिवारिक बीमारी लिखी है जिससे ग्राहक के भी प्रभावित होने की आशंका है या फिर फॉर्म में लिखा है कि ग्राहक को शराब सिगरेट या कोई और नशा करने की ऐसी आदत है जिससे उसके स्वास्थ्य के खराब होने की आशंका है या ग्राहक किसी ऐसे देश की यात्रा करके आया है जहां कोई महामारी फैली हुई है अब ग्राहक को यदि बीमा करवाना है तो वह जांच करवानी ही पड़ेगी कंपनी बिना किसी कारण से भी नॉन मेडिकल वाले ग्राहक को मेडिकल जांच करवाने के लिए कह सकती है क्योंकि कंपनी का अधिकार है

अंडरराइटिंग निर्णय

मेडिकल एंड राइटिंग के निर्णय चार प्रकार से हो सकते हैं पहला तो यह कि मेडिकल रिपोर्ट की जांच के बाद कंपनी सीधे पॉलिसी जारी कर दे इसे कहते हैं स्टैंडर्ड रेट पर पॉलिसी जारी करना दूसरा निर्णय हो सकता है कि कंपनी ग्राहक को उतना ही लाभ देने के लिए कुछ ज्यादा प्रीमियम चार्ज करें ऐसा तब होता है जब यह मान लिया जाए कि वह अपनी आयु के सामान्यता स्वस्थ आदमी जितना स्वस्थ नहीं है तीसरी स्थिति होती है जब कुछ समय पहले ही हुए किसी ऑपरेशन आदि के कारण बीमा कंपनी के लिए तुरंत निर्णय लेना कठिन हो तब वह ग्राहक का पैसा वापस लौट आते हुए पॉलिसी को 6 महीने या साल भर के लिए पोस्टपोन कर देती है चौथा निर्णय हो सकता है जब कंपनी ग्राहक का पैसा लुटाते हुए बता दें कि वह इस ग्राहक का कभी भी बीमा नहीं करना चाहेंगे पहला निर्णय यानी पॉलिसी का स्टैंडर्ड रेट पर जारी होना तो कोई समस्या है ही नहीं दूसरे केस में जब एक्स्ट्रा प्रीमियम लग जाए तो ग्राहक को समझाना कठिन हो सकता है आइए चर्चा करते हैं कि इस स्थिति में हम ग्राहक को कैसे समझाएं सामान्यतः ग्राहक की पहली प्रतिक्रिया होती है कि आपकी कंपनी उसके साथ नाजायज कर रही है और दूसरी कोई भी कंपनी उसे सामान्य रेट में ही पॉलिसी दे देगी हम ग्राहक से बात करेंगे कि सब कंपनियों के अंडरराइटिंग के नियम लगभग एक जैसे होते हैं इसलिए यदि एक कंपनी ने जांच कर एक्स्ट्रा प्रीमियम लगाया है तो पूरी संभावना है कि दूसरी कम कोई भी कंपनी ऐसा ही करेगी हालांकि एक्स्ट्रा प्रीमियम में थोड़ा बहुत अंतर हो सकता है दूसरे हम ग्राहक को समझाएंगे कि यदि उसने हमारी पॉलिसी में एक्स्ट्रा प्रीमियम ना देकर किसी और कंपनी में बीमा के लिए आवेदन किया तो वह उस कंपनी के फॉर्म में वहां क्या लिखेगा जहां पूछा होता है कि आप के आवेदन पर किसी बीमा कंपनी ने एक्स्ट्रा प्रीमियम तो नहीं लगाया यदि वह इसमें हां लिखेगा तो हमारे निर्णय का हवाला देगा तो वह कंपनी ज्यादा चुकाने होकर जांच करेगी और पूरी संभावना है कि वह भी ज्यादा प्रीमियम की मांग करेगी यदि उसने वहां ना लिखा तो पॉलिसी पहले दिन से ही फर्जी हो गई ऐसी पॉलिसी जो गलत जानकारी देकर खरीदी गई है उसमें किसी क्लेम के रिजेक्ट होने की संभावना बहुत ज्यादा है इसलिए ग्राहक के पक्ष में यही बेहतर है कि वह सच्चाई को स्वीकार करें और जो भी ज्यादा प्रीमियम मांगा गया है उसे दे और बेफिक्र हो कर रहे यदि मेडिकल के बाद किसी ग्रह की पॉलिसी कंपनी द्वारा नकार दी जाए तो यह सीधे-सीधे बिजनेस का नुकसान है एजेंट के लिए स्थिति में आप ग्राहक को समझाएं कि महोदय हमने पॉलिसी के लिए पांच 10 साल देरी से आवेदन किया यदि यह आवेदन पहले किया गया होता तो यह स्थिति नहीं आती हम आपके लिए बीमा खरीदने का विकल्प बंद हो चुका है अच्छी बात यह है कि वह विकल्प परिवार में बाकी लोगों के लिए तो खुला है इसलिए बेहतर होगा कि आप इसी पैसे से परिवार के बाकी लोगों के लिए पॉलिसी ले ले परिवार में पत्नी बेटे बेटी के नाम से पॉलिसी खरीद कर खुद प्रीमियम देकर भी वह टैक्स छूट तो ले ही सकता है

मेडिकल टेस्ट कैसे करवाएं

जब आपको किसी पॉलिसी के लिए ग्राहक की मेडिकल जांच करवानी हो तो आप किन किन बातों का ध्यान रखेंगे सबसे पहली बात तो यह है कि क्या आपको मालूम है कि वह टेस्ट किस चीज का है और उसमें क्या जांच की जाती है एक प्रोफेशनल एजेंट के रूप में आप से यह अपेक्षा की जाती है कि आपको इसकी जानकारी होनी चाहिए यदि पहले से नहीं जानते हैं तो ग्राहक को बताने से पहले इसके बारे में पता करके जाएं बेहतर होगा आप इन सब टेस्ट की डिटेल अपनी फाइल में लगाएं आपको यह भी ज्ञात होना चाहिए कि इस टेस्ट के लिए खाली पेट ही जाना जरूरी है या कुछ खाकर जा सकते हैं यदि टेस्टिंग खाली पेट होनी है तो ग्राहक को स्पष्ट बताएं कि खाली पेट का मतलब है सिर्फ पानी पी सकते हैं अक्सर लोग यह समझते हैं कि चाय पी कर भी हम खाली पेट ही कहलाते हैं चाय पीने से भी खून की जांच होने से उसमें शुगर बड़ी हुई आती है यदि खाकर जाना है तो कितनी देर पहले क्या खा सकते हैं यह अवश्य बताएं ध्यान रहे कि मेडिकल करवाने के लिए ग्राहक को डॉक्टर के यहां अकेले नहीं भेजे ग्राहक के अकेले जाने से पहले नुकसान तो यह हो सकता है कि यदि वहां दो और ग्राहक आए हुए हैं जिनके एजेंट उनके साथ हैं तो ग्राहक को लगता है कि आप वैसे प्रोफेशनल एजेंट नहीं है जैसे दूसरे एजेंट हैं दूसरा नुकसान होने की आशंका यह है कि जो दो और एजेंट वहां आए हुए हैं उनके सामने आपका ग्राहक खुला खड़ा है जिसे वे अपनी पॉलिसी बेचने की कोशिश कर सकते हैं वैसे भी ग्राहक जब हाल में जाता है तो उसे नहीं मालूम वहां किस से बात करनी है कहां वजन करवाना है कहां खून की जांच करवानी है किस फॉर्म पर साइन करने हैं आपके लिए हर रोज का काम हो सकता है यदि आप साथ रहेंगे तो ग्राहक को लगता है कि समय भी कम लगा और वह कुछ तनाव से बच गया मेडिकल टेस्ट करवाते समय ग्राहक को एक पहचान पत्र और उसकी फोटो कॉपी भी साथ लेकर जानी चाहिए प्रयास करें कि सारी मेडिकल जांच एक ही बार में हो कुछ कंपनियां मेडिकल जांच घर पर भी करवाने की सुविधा देती है जिसका उपयोग किया जा सकता है

प्रोस्पैक्टिंग (Prospecting)

प्रोस्पेक्टिंग का मतलब है नए ग्राहकों को ढूढंना। पॉलिसी को बेचना इतना मुश्किल कार्य नहीं है जितना कि नए ग्राहकों को ढूंढना जिनको पॉलिसी बेची जा सके। इसके लिए हर बीमा विशेषज्ञ के पास अपना-अपना एक समाधान हो सकता है। मैं बिल्कुल साधारण तरीके से आपको प्रोस्पेक्टिंग के बारे मे बताने वाला हूं, मुझे लगता है कि आप आसानी से इन सभी बातों को समझकर ज्यादा लाभ उठा सकते हैं।  

आप सभी अभिकर्ता अपने सभी जानने वालों की एक लिस्ट बनाएं। हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब एजेंट से यह पूछा जाता है कि इस तरह की लिस्ट बनाने में कितना समय लगेगा तो कोई एजेंट बोलता है 2 घंटे, कोई कहता है 2 दिन, कोई 1 सप्ताह की बात करता है। फिर उनसे पूछा जाता है कि क्या इसके बाद कोई भी ऐसा आदमी नहीं बचेगा जिसको आप जानते हों और जिसका नाम लिस्ट में नहीं है, तो वे सोच में पड़ जाते हैं। ध्यान रहे कि हमें अपने सभी जानने वालों की लिस्ट बनानी है, कंप्यूटर पर या कागज पर। मेरा मानना यह है कि यह एक ऐसी लिस्ट है जो कभी समाप्त नहीं होगी। आप आज यदि दो सौ नाम इसमें लिख भी लेंगे तो कल आपको कुछ और नाम याद आएंगे और हर रोज नए नाम याद आते ही रहेंगे। इस सूची में निरंतर नाम जुड़ते रहेंगे। 

आप इस लिस्ट को जितना बड़ा कर लेंगे आप की पॉलिसी बेचने की संभावना उतनी ही बढ़ती चली जाएगी। इस सूची को बढ़ाने का बढ़िया तरीका यह है कि आप उसे सेगमेंट के अनुसार बनाएं, एक-एक वर्ग के अनुसार। उदाहरण के लिए आप एक वर्ग(segment) बनाएं रिश्तेदार। उसमें फिर ऊपवर्ग(sub segment) बनाएं, अपनी और के रिश्तेदार यानी आपके भाई, चाचा, मामा, नाना आदि। दूसरा उप वर्ग बनेगा आपके ससुराल पक्ष के लोग यानी आपके साले, सालियां, साडू, चाचा ससुर, मामा ससुर, आदि। एक वर्ग बनेगा आपके सहपाठी यानी आपके साथ स्कूल और कॉलेज में पड़े हुए लोग, जिनका आज आपको अता-पता मालूम है। हर स्कूल और कॉलेज में आपकी कक्षा के छात्र, आपसे एक साल सीनियर और जूनियर, वहां आपके साथ नाटक करने वाले और आपके साथ खेलने वाले छात्र, 10 साल पहले कॉलेज में आप से झगड़ा करने वाले छात्र को आज अपना मित्र ही मानें। स्कूल, कॉलेज के किसी अध्यापक से भी यदि आप संपर्क में हैं तो उनका भी नाम लिखें। यदि आप हॉस्टल में रहे तो आपके साथ रहने वाले छात्रों के नाम भी लिखें, यदि आप आज उनका अता-पता जानते हैं चाहे वह आपकी कक्षा में ना पढे हों। 

इसके बाद आप वर्ग बनाएं पड़ोसी। आप जहां भी रहे, आपके अडोस-पड़ोस में रहने वाले सब लोगों के नाम लिखें। पड़ोसी आपके घर और दफ्तर दोनों के हो सकते हैं। इसी में आप अपने मकान मालिक और किराएदार का नाम भी लिखें। अगला वर्ग हो सकता है दोस्तों का। इसमें वे नाम लिखें जिनसे आपकी मित्रता हुई, कहीं भी। किसी क्लब में, होटल में, सुबह सैर के समय, रात को पान खाने के समय, कहीं सिनेमा देखते समय, किसी मित्र के घर पार्टी में, आदि जिन लोगों से आपके संबंध बने, वे लोग इस सूची में डालें। वे लोग जो आपको गुरुद्वारे में, मंदिर में मिलते हैं, आपके साथ दूसरे धार्मिक व सामाजिक कार्य करते हैं, उनके नाम भी इसमें लिखें। 

एक वर्ग हो सकता है आपके साथ काम किए हुए लोगों का। ये वे लोग हैं जिन्होंने आपके साथ किसी भी दफ्तर में काम किया। उस दफ्तर में आपके साथ काम करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि वे लोग भी जिनसे आप वहां कुछ खरीदते या बेचते थे। उनमें से कुछ लोग जरूर होंगे जिन से आप आज संपर्क कर सकते हो।

एक सूची बन सकती है उन लोगों की जिनसे आप आज कुछ खरीदते हो। इसमें नाम होगा आपके राशन वाले का, दूध सप्लाई करने वाले का, आपकी कार रिपेयर करने वाले का, आपके ड्राई क्लीन वाले का, आपके सिक्योरिटी वाले का, आपके कार बीमा करने वाले का, आपके बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाले का, आपके माली का, चौकीदार का, आपके यहां अखबार बांटने वाले का, आपका टेलर, आपका मोबाइल रिपेयर करने वाला, उस रेस्तरां का मालिक या मैनेजर जहां आप अक्सर डिनर करने जाते हो, मंदिर का पुजारी, आदि। 

एक सूची बन सकती है आपके बच्चों के दोस्तों के माता-पिता की  जिन्हें आप जानते हैं। आपके कुछ पेरेंट्स से तो संबंध होंगे, जो आपको बच्चों के स्कूल में मिलते हैं, या जिनके बच्चे आपके बच्चे के जन्मदिन पर आते हैं और अपने जन्मदिन पर आपके बच्चों को बुलाते हैं। वे बच्चे जो आपके बच्चों के साथ खेलते हैं, उनके माता-पिता को भी आप इसी सूची में रखें। 

इसके बाद एक वर्ग आप बना सकते हैं उन लोगों का जो आपके शहर में अलग-अलग कॉलोनी में रहते हैं, जैसे नेहरू नगर, कमला विहार, ज्ञान कुंज, रेलवे रोड, मॉडल टाउन, वगैरह। आपके परिचित वे लोग जो आसपास के दूसरे नगरों में रहते हैं, उनके नाम भी इसी में जोड़ें। 

इसी तरह से आप एक वर्ग बनाएं जिसमें उन तमाम डॉक्टरों के नाम लिखें जिन्हें आप जानते हैं, एक वर्ग हो सकता है केमिस्ट, एक वर्ग किराना दुकानदार, एक वर्ग वकील, एक वर्ग स्कूल के अध्यापक, और इस तरह से आप प्रोफेशन के हिसाब से अलग-अलग सूची बना सकते हैं। 

आप एक सूची में अपनी पत्नी की सहेलियों के पतियों को रख सकते हैं यदि आपकी पत्नी विवाह से पहले आप ही के शहर में रहती थी और वे आपकी बीमा एजेंसी में आपको सहयोग करने को तैयार हूं तो आप उनके साथ पड़ी लड़कियों के नाम उनके दूसरे परिचित पड़ोसी आदि के नाम भी लिख सकते हैं इसी तरह से अनेक वर्ग के हिसाब से सूची बनाने का लाभ यह है कि आपको बहुत से नाम याद आते रहेंगे या सूची कभी न समाप्त होने वाली सूची होगी जिसमें आप निरंतर नाम जुड़ते ही रहेंगे एक बात का ध्यान रहे कि आपको लिस्ट बनाते समय यह नहीं सोचना है कि कौन आदमी आपसे पॉलिसी खरीदेगा कौन नहीं इस प्रकार पहले दो-तीन दिन में सूची जितनी तैयार हो जाए उसके बाद आप सोचें कि क्या इन सब लोगों को मालूम है कि आप जीवन बीमा के एजेंट हैं और आपकी इस क्षेत्र में क्या उपलब्धियां है आपको लगेगा कि इस सूची में ज्यादातर लोग ऐसे हैं जिन्हें यह सब चीजें पता ही नहीं है क्या आपको नहीं लगता कि इन लोगों को बीमे के लिए टटोलना सबसे आसान काम हो सकता है मेरा मानना यह है कि जिन लोगों को आप जानते हैं और जो आपको जानते हैं उनसे भी मैं की बात करके पॉलिसी बेचना सबसे आसान काम होता है सुझाव है कि आप इस तरह की सूची बनाना तुरंत तैयार करें और उन सब लोगों से मिलना शुरू करें मेरा मानना है कि इससे जो परिणाम निकलेगा वह आपकी आशा से बहुत बेहतर होगा आपका पहला काम होना चाहिए कि आप इन सब लोगों को इस बात की सूचना दें कि अपने-अपने फल आम बीमा कंपनी की एजेंसी ले ली है और आप जल्दी ही उनसे संपर्क करेंगे इससे लाभ यह होगा कि आपके परिचित लोगों को मालूम हो जाएगा कि आप इस व्यवसाय से जुड़ चुके हैं हो सकता है कि वह आजकल में ही कोई बीमा पॉलिसी खरीदने वाले हो तो मैं आपसे बात किए बिना निर्णय नहीं लेंगे आप के लिए चुनौती यह है कि यदि आपकी बीमा कंपनी का कोई और एजेंट उनसे पॉलिसी बेचने के लिए संपर्क करें तो उन्हें तुरंत याद आना चाहिए कि आप भी उसी कंपनी के एजेंट हैं आप लोगों को सूचना देने के लिए ईमेल टेलीफोन s.m.s. या पत्र का प्रयोग कर सकते हैं।

नहीं सर कल में घुसे

सामान्यतः एक एजेंट एक निश्चित दायरे में ही काम करता है वह या तो सरकारी नौकरी वालों को जानता है या सब्जी मंडी के व्यापारियों को या किराना के दुकानदारों को या स्कूल के अध्यापकों को या किसी और सर्कल के लोगों को जाहिर है कि वह इन्हीं लोगों को ज्यादा पॉलिसी भेजता है आपको चाहिए कि आप चेस्टा करके किसी नए सर्कल में घुसे आपको विशेष प्रयास करके दूसरे सर्कल के एक या दो नए लोगों को पॉलिसी बेचनी है जिससे उस सर्कल के ही आपको रेफरेंस मिलने चालू हो एक नया सर्कल चालू करने से आपके प्रोस्पेक्ट की संख्या बहुत तेजी से बढ़ सकती है कोई भी नया सर कल आपके पुराने सर्कल में जुड़ाव का ही काम करेगा

स्टॉल

इसके अलावा आप कहना पिया स्टार लगा सकते हैं किसी भी चहल-पहल वाले बाजार में किसी शॉपिंग मॉल में किसी सड़क के किनारे किसी स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग के दिन किसी दिवाली मेले में कहीं होली मिलन में कहीं किसी प्रतियोगिता में किसी कॉन्फ्रेंस में और ऐसे ही किसी अन्य स्थान पर ध्यान रहे कि इस तरह के स्टाल पर पॉलिसी बिकती नहीं है सिर्फ पॉलिसी के बारे में पूछताछ होती है यहां आपको ग्राहक का सिर्फ नाम और फोन नंबर लेना है फिर उसके सुझाए गए समय पर उससे मुलाकात करनी है स्टाल पर आपको सिर्फ यह बताना है कि आपके पास सभी प्रकार के प्लान है जो आप उस ग्राहक की आवश्यकता अनुसार बता सकते हैं कोई भी ग्राहक अपने साथ चेक आयु प्रमाण पत्र पहचान पत्र पुरानी पॉलिसी की डिटेल नहीं लेकर घूमता कि आप से पॉलिसी समझकर आपको वही सब कुछ थमा दे

नया पड़ोसी

जब कोई आदमी किसी नए इलाके में जाकर बसता है तो उसे वहां के बारे में कुछ भी मालूम नहीं होता उस समय यदि कोई आगे बढ़ कर खुद ही उससे संबंध बना ले तो वे संबंधित ज्यादा गहरे होते हैं यदि आपके पड़ोस में कोई नया परिवार आकर बसे और आप स्वयं उनसे मिलकर उन्हें बता दें कि यहां गैस की एजेंसी कहां है बिजली और पानी के दफ्तर कहां है डॉक्टर कहां है स्कूल कौन से अच्छे हैं दूध कहां से ताजा मिलता है घरेलू नौकरानी कौन सी बेहतर है आदि अन्य बातें हैं जिनकी उन्हें अभी बहुत जरूरत है तो उनके आपसी संबंध नजदीकी हो जाएंगे कुछ समय बाद आप पूछ सकते हैं कि उनकी कोई बीमा पॉलिसी दूसरे शहर से यहां ट्रांसफर करवानी है क्या यह सर्विस आप उन्हें मुफ्त में देते हैं जब आपके उनसे निकट के संबंध बन गए हैं तो यह तय है कि उनको जब भी बीमा की आवश्यकता होगी वह आपकी और ही देखेंगे

म्युनिसिपालिटी से जानकारी

यदि आपके लिए संभव हो तो जन्म मृत्यु विभाग से पता करें कि किस के परिवार में बच्चे का जन्म हुआ है और किस के परिवार में दुखद घटना हुई है जहां जन्म हुआ है वहां आप एक बधाई पत्र भेज सकते हैं और साथ ही बच्चे के लिए प्लान की जानकारी हो सके तो इसके साथ उस प्लान का ब्रोशर भी भेज दें ध्यान रहे कि आप बच्चे के सेविंग प्लान की बात ही करें रिस्क कवर कि नहीं जिस परिवार में किसी का निधन हुआ है उन्हें आप शोक संदेश भेज सकते हैं और साथ ही है पत्र कि यदि उन्हें किसी बीमा क्लेम से संबंधित मदद चाहिए तो आपने कार्य बिना किसी शुल्क के कर सकते हैं यहां ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप सीधे तौर पर किसी आर्थिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं यदि वे लोग पुरानी पॉलिसी में क्लेम के लिए आपकी मदद लेते हैं तो स्वाभाविक है कि उनके परिवार को बाद में बीमा पॉलिसी आप ही बेचेंगे यदि उनका वर्तमान एजेंट अच्छा होता तो इस प्लेन को वही दिलवा रहा होता

अखबार में शोक समाचार

ऐसे ही यदि आपको समाचार पत्र में किसी का शोक समाचार नजर आए तो वहां पत्र लिखकर क्लेम के लिए अपनी सेवाएं निशुल्क ऑफर कर सकते हैं इस तरह से बनाए गए संबंधित दीर्घकाल में व्यापारिक रूप से बहुत लाभदायक साबित होते हैं

बच्चों के स्कूल में प्रतियोगिता

आजकल हर गली मोहल्ले में छोटे-छोटे स्कूल खुले होते हैं यदि आप किसी स्कूल में 50 बच्चों का एक ड्राइंग कंपटीशन करवाएं तो यह ज्यादा खर्च का काम नहीं है इसमें निर्णय का काम आप वहां के अध्यापकों को ही सौंप दे दो या तीन बच्चों को छोटे पुरस्कार भी दे दे उन बच्चों के माता-पिता को आप स्कूल से उनके फोन नंबर लेकर या उन बच्चों के माध्यम से ही बच्चों के प्लान के ब्रॉशर और अपना विजिटिंग कार्ड भेज दें तो वहां पॉलिसी बिकने की संभावना हो सकती है

साहस

आपका प्रयास यह होना चाहिए कि जो भी काम इनमें से आपको नया लग रहा है उसे करें यदि आरंभिक झिझक है तो उसे दूर करें जो काम करने में डर लगे उसे करने का नाम ही साहस है इसे एक रोचक घटना के माध्यम से समझें फौज के एक मेजर और एक पुलिस कमिश्नर में बहस छिड़ गई मेजर ने कहा कि उनके फौजी ज्यादा साहसी होते हैं और कमिश्नर ने कहा उनके सिपाही ज्यादा साहसी हैं अपनी बात साबित करने के लिए मेजर ने एक फौजी को बुलाया और आदेश दिया कि सामने 15 फीट ऊंची दीवार पर चढ़कर कूद जाओ फौजी तुरंत चढ़कर कूद गया तो मेजर बोला इसे कहते हैं साहब पुलिस कमिश्नर ने अपने एक सिपाही को बुलाकर उसे उसी दीवार से कूदने को कहा सिपाही बोला तेरा दिमाग खराब हो गया है क्या कमिश्नर ने कहा इसे कहते हैं साहस

ग्राहक के प्रति आपकी सोच

यह बात बहुत ही महत्वपूर्ण है कि आप ग्राहक के पास क्या सोचकर जा रहे हैं आपके लिए इस ग्राहक के पास यह पहली सेल है या आखरी सेल यह विचार आपकी सारी कार्यप्रणाली को बदल देगा यदि आप आखरी सेल के लिए जा रहे हो तो आपका मकसद किसी भी तरीके से एक पॉलिसी का चेक उठाना है इसके लिए आप कुछ भी झूठ सच बोल सकते हैं सफल बीमा एजेंट इस तरह से काम नहीं करते उनके लिए कोई भी सैलरी नहीं होती हर नहीं ग्राहक को सेल उनके लिए यह एक नई श्रृंखला की शुरुआत होती है वे जानते हैं कि हर संतुष्ट ग्राहक आपके लिए सब एजेंट की तरह होता है यदि एजेंट यह जानता है कि हर नया ग्राहक एक चेन की पहली कड़ी है तो वह ग्राहकों कुछ भी गलत नहीं बता सकता है वह जानता है कि वह जो कह रहा है उस बात को पांच 10 बरस के बाद भी उसे ही संभालना है वह जिस घर में घुस रहा है वहां यह स्थाई रूप से रहने वाला है जो एजेंट 3 बरस से पुराना हो गया है उसका दो तिहाई बीमा पुराने ग्राहकों से ही आता है आप जितने पुराने होते जाते हैं आपके बिजनेस में पुराने ग्राहकों का हिस्सा बढ़ता जाता है यह तभी संभव है जब आप ग्राहकों को पूरी संतुष्टि दें

ग्राहक को जानकारी ना होने का लाभ

यह बात तय है कि किसी भी सेल्समैन को जितनी जानकारी अपने सामान के बारे में होती है उतनी खरीदने वाले को नहीं होती ग्राहक को जिन बातों की जानकारी नहीं है यदि सेल्समैन उनका लाभ उठाना शुरू कर दे तो वह एक बार समान तो भेज सकता है पर अपनी अलग पहचान नहीं बना सकता ग्राहक को हमेशा के लिए अपना नहीं बना सकता यदि आप किसी फर्नीचर की दुकान पर सोफा सेट खरीदने के लिए जाएं तो आप दुकानदार से यह अपेक्षा करते हैं कि वह आपको वह सब बातें भी बताएं जो आप सोफा के बारे में नहीं जानते हैं उसमें लकड़ी है क्वेश्चन है स्प्रिंग है और कपड़ा है दिखाई दे रहा है सिर्फ कपड़ा बाकी सब सामान उसके नीचे छिपा है उन चीजों के बारे में आप नहीं जान सकते हैं वही जानता है क्योंकि उसने बनाया है यदि वह आपको सब कुछ अच्छा अच्छा बता कर दे दे तो आपको किसी भी कमी का पता नहीं चलेगा 6 महीने के बाद जब लकड़ी सो कर उठने लगेगी तो सोफा चटकने लगेगा उस समय आप उस दुकान द्वारका भले ही कुछ ना बिगाड़ पाए लेकिन एक काम तो आप कर ही सकते हैं यदि कोई मित्र आपसे पूछे की बहन की शादी के लिए फर्नीचर खरीदना है कहां से खरीदें तो आप सीधे यही कहेंगे कि फला दुकान को छोड़कर कहीं से भी खरीद लो वह दुकानदार आपको जानकारी ना होने का लाभ उठाकर आप के माध्यम से ग्राहकों की एक चेन नहीं बना पाया यदि आप उसके सामान से संतुष्ट होते तो यह जवाब देते कि श्याम फर्नीचर स्टोर से ही खरीद लो और निश्चिंत हो जाओ ऐसी दुकान से सामान खरीदने के लिए अगर 5% ज्यादा भी खर्च करना पड़े तो लोग खुशी से कर देते हैं क्योंकि उस से मानसिक शांति तो मिल ही रही है ना कहीं आप भी ग्राहक को बीमा की जानकारी ना होने का लाभ तो नहीं उठा रहे बीमा बेचना आपका पैसा है बीमा खरीदना उसका पैसा नहीं है जो काम आप हर रोज करते हो वह कभी-कभी करता है अतः आप ही इसके बारे में ज्यादा जानते हो और ग्राहक आप पर भरोसा करता है आपने अपने लाभ के लिए उसका नुकसान कर दिया तो आपने चैन को पहली कड़ी पर ही समाप्त कर दिया।

मुकाबला अगले एजेंट से है

ग्राहक राय पूछता है कि इतना रुपया सारा ना देने पर 20 साल बाद कितना रुपया मिलेगा प्रायः एजेंट को लगता है कि आज कुछ भी प्रोजेक्शन ग्राहक को दे दो क्या फर्क पड़ता है यदि पॉलिसी मैच्योर होने से पहले यह ग्राहक चल बसा तो किसी को क्या मालूम होगा कि मैंने क्या कहकर पॉलिसी बेची थी यदि यह जिंदा रहा तो मैच्योरिटी पर इसे क्या याद रहेगा कि मैंने 15 साल पहले इसे क्या बताया था कहां पर है मानकर चलें कि आपका मुकाबला इस ग्रह के पास आने वाले अगले एजेंट से है जो कल एक महीने बाद या 1 साल के बाद कभी भी इसके पास आ सकता है कल्पना करें कि कोई एजेंट इस्क्रा के पास आए और बीमा की बात करें यह ग्राहक उससे कहे कि उसे तो अपने लिए एक मनी बैक प्लान चाहिए था जो उसने एक महीना पहले ही आपसे लिया फिर वह ग्राहक उस एजेंट को अपनी पॉलिसी दिखाएं दूसरा एजेंट उसे देखते ही बता दें कि इस प्लान में तो मनी बैंक है ही नहीं यह तो टर्म प्लान है या पेंशन प्लान है तो आपकी क्या विश्वसनीयता रहेगी ग्राहक के दिमाग में ऐसा नहीं है कि जो कुछ आपने उसे पॉलिसी बेचने के लिए बताया वह बात 15 साल के बाद ही खुलेगी। वे पत्ते कभी भी खुल सकते हैं। इसलिए ध्यान रहे कि जल्दी अंडे के लिए मुर्गी को ना काटे आजकल वैसे भी हर पॉलिसी में 15 दिन का फ्री लुक पीरियड रहता है यानी ग्राहक चाहे तो इस दौरान पॉलिसी वापस करके कंपनी से पूरे पैसे ले सकता है यदि ग्राहक को किसी दूसरे एजेंट के माध्यम से असलियत इसी दौरान पता लग गई तो पॉलिसी वापस भी हो सकती है

कितना समय ग्राहक के साथ

एक एजेंट के रूप में आपका जो भी काम है जैसे पॉलिसी बेचना क्रिस्टल लेना कंपनी में जमा करवाना नसीब ग्राहक को पहुंचाना आदि इनमें से सिर्फ एक काम ऐसा है जो आप ही को करना है वह है पॉलिसी बेचने का बाकी के सब काम तो आप किसी थोड़ी सी तनख्वाह वाले कर्मचारी से करवा भी सकते हैं पॉलिसी बेचने का काम ऐसा है जो आप ही को करना है आप सोच कर देखिए प्रतिदिन आप कितना समय ग्राहकों को नई पॉलिसी बताने में लगाते हो 1 साल में 200 पॉलिसी बेचने वाले एजेंट भी बताते हैं कि 1 दिन में 1 घंटे से ज्यादा समय में इस काम में नहीं लगाते आप जानते हैं कि आप ज्यादा समय लगाएं और ज्यादा लोगों से मिले तो ज्यादा पॉलिसी भेज सकते हैं क्या कारण है कि आप ज्यादा लोगों से नहीं मिलते हो इसका प्रमुख कारण है कि लोग आपको मिलने का समय नहीं देते हैं आप कहेंगे कि यदि लोग मिलने को तैयार हो जाएं तो आप 1 दिन में 5 लोगों से भी मिल सकते हैं आपको लगता है कि आपके काम की गति का लीवर किसी और के हाथ में है एक अलग तरीके की बात करते हैं जिससे आप ही तय कर पाएंगे कि कितने लोगों से 1 दिन में मिलना है मान ले कि आपका कोई दोस्त आपसे मिलने के लिए 2 महीने के बाद आया वह प्रॉपर्टी खरीदने बेचने का काम करता है वह आपके पास आकर बैठ गया और अपनी ओर से कोई बात नहीं कर रहा है तो आप उससे क्या बात करेंगे आप की स्थिति में ज्यादातर लोग ऐसे ही बात करेंगे और बताओ आपका प्रॉपर्टी मार्केट कैसा चल रहा है माल ले वह कहे कि आजकल रामनगर की प्रॉपर्टी मार्केट में बड़ा उछाल आ रहा है ऐसी प्राप्ति उपलब्ध है जिसमें 2 साल में अच्छा मुनाफा आ सकता है मैं भी आजकल ऐसे ही सौदे करवाने में व्यस्त हूं यह सुनकर क्या आप चुप बैठेंगे वह यदि अपनी ओर से रुचि ना भी दिखाई तो भी आप उससे पूछें लगेंगे ऐसी कोई प्रॉपर्टी है क्या उसने सिर्फ एक काम किया कि आप की उत्सुकता जगा दी और आप खुद ही उससे कुरेद कुरेद कर पूछ रहे हैं क्या ऐसा काम हम जीवन बीमा में नहीं कर सकते हैं आप किसी ऐसे ग्रह के पास बिना समय लिए चले जाएं जो जानता है कि आप बीमा एजेंट हैं आप भी में की बात अपनी ओर से उससे नहीं करें हम अपनी ट्रेनिंग में है प्रयोग करते हैं एजेंट आकर बताते हैं कि 5 मिनट में ही सामने वाले पूछने लगता है तुम्हारी एजेंसी कैसी चल रही है बीमा कंपनी कैसी चल रही है आप उससे कहीं कि आजकल बहुत ज्यादा प्रेशर है हर रोज नए प्लान आ रहे हैं जिन्हें पहले से ज्यादा लाभ है ग्राहकों को पता नहीं हम हम से पहले कैसे यह मालूम हो जाता है कि ऐसा एक प्लान आया है और वे खुद फोन करके बुलाने लगते हैं सुबह से तीन से तो मिल चुका हूं आपके यहां तो बस चाय पीने के लिए आया हूं यह कह कर आपने उस की उत्सुकता खड़ी कर दी क्या आपको लगता है कि अब ग्राहक बैठेगा आप यदि अपनी ओर से कुछ ना भी कहे तो तो भी चाय आने तक वह खुद आपसे तीन बार पूछ लेगा कि नया प्लान क्या है इसे भी एजेंट के लिए इतना असर तो बहुत है जब ग्राहक खुद आपसे पॉलिसी के बारे में पूछ रहा है एजेंट गलती यही करता है कि वह ग्राहक की ओर से सवाल आने का तो इंतजार ही नहीं करता सीधा अपनी और से पॉलिसी के बारे में बताना शुरू करता है ग्राहक उसे टालने की कोशिश करता है यदि हम उसकी उत्सुकता को इतना बढ़ा दे कि वह खुद हमें कुरेदना चालू कर दें तो हम कितने भी लोगों से मिल सकते हैं और पॉलिसी भेज सकते हैं यदि 1 दिन में हम तीन लोगों से इस तरह से मिलने लगे तो मान कर चलें कि एक पॉलिसी हर रोज आप भेज सकते हैं यदि आप ऐसा करने में सफल हो गए तो आप की गिनती देश के चोटी के एजेंट्स में होने लगेगी आप उन लोगों से तो मिलेंगे ही जो आपको मिलने का अपॉइंटमेंट ले रहे हैं और इस नए तरीके से आप कितने लोगों से मिलेंगे यह आप ही तय कर रहे हैं क्योंकि इसके लिए आपको कोई अपॉइंटमेंट लेना ही नहीं है इस तरह से मिलने का एक लाभ और भी होगा अब क्योंकि आप ही तय कर रहे हैं कि आप किससे मिलेंगे तो आप एक ही इलाके में रहने वाले लोगों से 1 दिन में मिले जिससे आने जाने में ज्यादा समय ना लगे और आप ज्यादा से ज्यादा लोगों से मिल पाए यदि आप अपना समय नई पॉलिसी बेचने में लगाने लगे तो बाकी रूटीन वाले काम आपका एक असिस्टेंट संभाल सकता है मेरा सुझाव है कि आप आज से ही इस तरह लोगों से मिले अपने दायरे को बढ़ाएं और स्वयं अनुभव करें कि आप कितनी बड़ी सफलता की ओर जा रहे हैं यदि मुझे इस पुस्तक के सबसे बढ़िया नुस्खे को चुनना हो तो मैं इसी 1 तरके को चुनूंगा

क्या आप सबसे अच्छी स्थिति मे हैं?

जब एजेंट के हाथ से कोई पॉलिसी छूट जाती है तो उसे लगता है कि उसकी कंपनियां उसकी पॉलिसी में ही कोई कमी है उसे लगता है कि उसकी कंपनी से बेहतर दूसरी कंपनी है जिसका नाम ज्यादा बिकता है किसी को लगता है दूसरी कंपनियों के प्लान उसके प्लान से ज्यादा बेहतर है या कमीशन बेहतर है या पुरस्कार राशि से बेहतर है या कुछ और खुफिया उनमें है जो उसके पास नहीं है कोई भी कंपनी पूर्ण नहीं होती है जिसमें कोई कमी नहीं निकाली जा सके हर कंपनी की अपनी ताकत और कमजोरी होती है कोई भी कंपनी तभी पूर्ण कही जा सकती है जब उसके बारे में ग्राहक किसी भी प्रकार का सवाल ना उठा सके यदि ऐसा हो जाए तो पूरे देश के लोग उसी कंपनी से पॉलिसी लेंगे और सारी प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाएगी ऐसा होना संभव ही नहीं है ऐसे ही कोई प्लान इतना पूर्ण हो कि कोई ग्राहक उसके बारे में कोई प्रश्न ही नहीं बचे तो वह स्थिति सेल्समैन के लिए सर्वश्रेष्ठ होगी क्योंकि पूरा कंपटीशन समाप्त हो जाएगा इसका मतलब बाकी सब प्लान बंद पर यह संभव नहीं है एक क्षण के लिए मान ले कि ऐसी स्थिति आ गई कि आपकी कंपनी पूर्ण हो गई आपके प्लान भी पूर्ण हो गए और आपके प्लान में रिटर्न 20 सबसे ज्यादा हो गया वह स्थिति आ गई जब आप जिस के पास जाएंगे उसे पॉलिसी लेनी ही पड़ेगी क्योंकि ग्राहक के पास कोई विकल्प है ही नहीं ऐसा भी हो सकता है कि आपको लोगों के पास जाना ही ना पड़े और लोग खुद आपके पास लेने के लिए आ रहे हो क्या आपको लगता है कि आपके यह स्थिति सबसे बेहतर है यदि आपको ऐसा लगता है तो यह एक भ्रम है यदि ऐसा हो गया तो क्या आपकी एजेंसी बचेगी जब कंपनी सबसे बढ़िया हो गई प्लान सबसे बढ़िया हो गए लोग लाइन लगाकर खरीदने के लिए आ रहे हैं सारा कंपटीशन समाप्त हो गया तो फिर एजेंट की क्या जरूरत होगी एजेंट की जरूरत किसी भी माल को बेचने के लिए तभी तक है जब तक ग्राहक को उसके लिए समझाने की जरूरत है इन चीजों के बारे में समझाने की जरूरत नहीं होती उनके लिए एजेंट नहीं कुछ थोड़ी तनख्वाह वाले एग्जीक्यूटिव होते हैं क्या कभी बिजली विभाग से कोई आपके पास आता है कनेक्शन के बारे में समझा कर बेचने के लिए क्या कमी जल विभाग के एजेंट आते हैं आपको जल के फायदे समझाने के लिए क्या कभी आप रेल के टिकट बेचने वाला बाबू आपको डिस्काउंट ऑफर करता है और क्या आपको लगता है कि बिजली जलिया रेल का कोई बाबू इतना कमाता है जितना एक बीमा एजेंट कमाता है यदि जीवन बीमा ऐसे ही दिखने लगा तो सब की एजेंसी गई समझो और यदि लोगों को ऐसी स्थिति आने के बाद भी कोई कंपनी एजेंट को रखें तो किन्हे एजेंसी देगा सबसे बढ़िया कंपनी सबसे बढ़िया एजेंट को ही रखेगी क्या आपको लगता है कि आप देश के सबसे बढ़िया एजेंट्स में से एक हैं कंपनी तब यह नियम भी बना सकती है कि वही आदमी एजेंट बनेगा जो एमबीए है या 2 साल का बीमा का कोर्स करके आया है जो कंपटीशन वाली एक परीक्षा पास करेगा फुल टाइम यही काम करेगा या जो ₹200000 के सिक्योरिटी देने को तैयार है आप पता करके देखें कि मारुति या दूसरी बड़ी कार कंपनी अपनी एजेंसी किन लोगों को देती है और किन किन शर्तों पर देती है माल जितनी आसानी से बिकता है एजेंसी उतनी ही मुश्किल से मिलती है इसका अर्थ यही है कि आपका और आपकी कंपनी का एक आदर्श रिश्ता है आप चाहे तो कम अपनी कंपनी के प्लान में बहुत सारी कमियां निकाल सकते हैं और कंपनी चाहे तो आपके काम में उससे भी ज्यादा कमियां निकाल सकती है बेहतर यही है कि आप इस सच्चाई को स्वीकार करें कि ग्राहक से मिलने वाली ना मैं आप का आपकी पॉलिसी का और आपकी कंपनी का तीनों का ही योगदान है आप किसी भी अन्य कंपनी के साथ जुड़े होते तो भी आप ऐसी ही दिक्कतें झेल रहे होते क्योंकि कोई भी कंपनी या प्लान पूर्ण हो ही नहीं सकते

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