टाइम मैनेजमैंट (Time Management)

ईश्वर ने हम सभी को अलग-अलग क्षमताएं दी हैं। अलग-अलग शारीरिक बल  बुद्धि का स्तर, धन, परिवार की इज्जत, पड़ोसी, ऊंचे तबके के लोगों से संबंध, आदि सब चीजें हर व्यक्ति के लिए अलग-अलग हैं। एक ही चीज ऐसी है जो दुनिया के हर आदमी को, चपरासी से लेकर प्रधानमंत्री तक को बराबर मिली है। वह है समय। हर किसी के पास दिन में 24 घंटे ही हैं। किसी भी आदमी की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह इस समय का उपयोग कैसे करता है। बीमा एजेंट के रूप में मिलने वाली सफलता भी इससे अलग नहीं है। 

प्रसिद्ध लेखक स्टीवन को वे अपनी पुस्तक "सेवन हैबिट्स आफ हाईली सक्सेसफुल पीपल" में लिखते हैं कि हर आदमी के कार्यकलापों को चार भागों में बांटा जा सकता है।

अर्जेंट नहीं, महत्वपूर्ण नहीं

ये वे काम हैं जो ना हमारे लिए अर्जेंट हैं, ना ही महत्वपूर्ण। इनको यदि नहीं किया जाए तो हमारा किसी भी प्रकार का कोई नुकसान नहीं होगा। यह काम टाइम पास करने वाले काम हैं। कहीं खाली बैठे हैं, टीवी चल रहा है बस, बिना किसी मकसद के उसे देख रहे हैं, दूसरे मनोरंजन के साधन, किसी का अचानक फोन आ जाना और उसका हमें ऐसा काम बताना जिससे हमारा कोई सरोकार नहीं है, कोई झगड़ा जिसमें हम बेकार ही समय नष्ट कर रहे हैं, कोई ऐसा आदमी आकर बैठ गया जो आपका समय खराब कर रहा है और जिसे आप जाने के लिए नहीं कह सकते। 

किसी भी कामयाब आदमी को चाहिए कि वह अपने समय का कम से कम हिस्सा इस तरह की गतिविधियों में जाने दे। एक बीमा एजेंट को चाहिए कि वह समय की अहमियत को समझे और ब्रांच में खाली बैठकर या बिना किसी उद्देश्य के घूम फिरकर अपने कीमती समय को व्यर्थ ना गवाएं। यदि बैठना भी हो तो किसी कामयाब एजेंट या मैनेजर के पास बैठें, जिससे कुछ लाभ मिल सके।

अर्जेंट है, महत्वपूर्ण नहीं

दूसरी श्रेणी उन कामों की है जो जरूरी तो है लेकिन उनमें लगना मेरे किसी फायदे का नही है, यानी मेरे लिए महत्वपूर्ण नहीं है। यह वह काम है जो किसी मुख्य काम में व्यवधान के रूप में आते हैं, जैसे अचानक कोई मिलने के लिए आ जाए, कोई मीटिंग बुला ली जाए, जिसे आप मना ना कर सकें, कोई रिपोर्ट अचानक बनाकर भेजनी है, आदि। 

प्रायः ऐसे काम कार्यालय में काम करने वाले लोगों के होते हैं, जिन्हें कम से कम करने का प्रयास करना चाहिए। समस्या यह है कि ये सभी काम किसी और के द्वारा हम पर थोपे हुए होते हैं इसलिए हमारा इन पर नियंत्रण कम होता है। एक एजेंट के लिए इस तरह के काम हो सकते हैं कि अचानक किसी ग्राहक का फोन आ गया कि उसे आज ही इनकम टैक्स की रिटर्न भरनी है और बीमे की रसीद नहीं मिल रही। अब तुरंत आपको डुप्लीकेट रसीद तैयार करनी पड़ेगी। एक जनरल बीमा का एजेंट किसी जरूरी सेल्स कॉल पर जा रहा है और किसी ग्राहक का फोन आ गया कि उसकी कार का एक्सीडेंट हो गया है, आप तुरंत उसकी मदद करें। जितना ज्यादा समय इन कामों में जाएगा, उतना ही सार्थक कामों में कम जाएगा।

अर्जेंट है, महत्वपूर्ण है

यह वे सभी काम हैं जिनको करना तुरंत जरूरी है और वे महत्वपूर्ण भी हैं। इनमें वे काम गिनें जा सकते हैं जो एक निश्चित तिथि तक ही पूरे करने हैं और वह तिथि आ गई है। किसी ग्राहक की किस्त आपको आज लेनी थी, ना जमा होने पर पॉलिसी लैप्स हो जाएगी। आपको एक क्लब मेंबरशिप करनी थी, 10 पॉलिसी करनी अभी रहती है और दो ही दिन बचे हैं। आपको किसी ग्राहक को उसकी रसीद देनी थी, आप समय पर दे नहीं पाए, अब उसे रसीद पहुंचाने के लिए स्पैशली उनके घर जाना पड़ेगा। यह वह काम है जो आप चाहते तो पहले कर सकते थे, परंतु समय पर ना किए जाने से वे अर्जेंट हो गए हैं। 

जो लोग इस तरह से काम करते हैं वह बहुत ही दबाव में काम करते हैं। अंतिम समय में काम करने से गलतियां करते हैं, खर्च ज्यादा करते हैं, तनाव भी झेलते हैं, और सफलता की संभावना उतनी ही कम कर लेते हैं। आखिरी दिन बिजली का बिल भरने के लिए लाइन में लगना या रेलगाड़ी पकड़ने के लिए घर से देरी से निकलना इसी तरह के कुछ उदाहरण हो सकते हैं।

अर्जेंट नहीं, महत्वपूर्ण है

यह वे काम है जो हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं, पर अभी जरूरी नहीं हैं। काम का महत्व है, पर उसे तभी कर लिया गया जब वह एकदम अर्जेंट नहीं हो गया। यह वह काम हैं जो समय रहते नहीं किए जाते तो अर्जेंट वाली श्रेणी में चले जाते, एमरजेंसी बन जाते। यदि टेलीफोन का बिल भरना है, अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना आपने भर दिया तो वह इस श्रेणी में है, अंतिम तिथि तक रुके रहे तो वह जरूरी हो जाएगा, जिस पर आपको ज्यादा भागदौड़ करनी है, जुर्माना देना है। यदि क्लब मेंबरशिप करनी है तो पहले से ही प्लानिंग है कि कितना बिजनेस किस महीने करना है, कितना प्रीमियम कहां से लेना है, कितने नए ग्राहकों से मिलना है, किससे रेफरेंस लेना है, किससे कब मनी बैक का फॉर्म भरकर मंगवाना है, आदि। 

ये सभी विकास के काम होते हैं, जैसे आप बीमार होने से पहले ही स्वास्थ्य का ध्यान रख रहे हो। यह करने से एमरजेंसी की स्थिति से बचाव होता है। इसमें प्लानिंग का काम है, नई संभावनाएं खोजने का काम है। इसलिए सफल लोग इस श्रेणी में ज्यादा से ज्यादा काम करते हैं। 

बीमा एजेंट इसके अलावा जो टाइम मैनेजमेंट कर सकता है, वह है एक निश्चित इलाके में ही पॉलिसी बेचना। यदि आप दिल्ली, मुंबई जैसे महानगर में रहते हैं और आपने इस तरह से पॉलिसी बेच रखी है कि आपका एक ग्राहक दूसरे ग्राहक से 30 किलोमीटर की दूरी पर है, तो आपको ज्यादा समय सड़क पर ही गुजारना पड़ेगा। यदि एक ग्राहक से मिलने जाने के लिए आपको 1 घंटे से ज्यादा का समय लगता है तो इसका अर्थ है कि आपको नया बिजनेस करने के लिए कम से कम समय मिल रहा है। आपका ज्यादा समय तो पॉलिसी की सर्विसिंग में ही जा रहा है, और बहुत सा खर्च भी। 

आपको तय कर लेना चाहिए कि आप एक निश्चित एरिया में ही पॉलिसी बेचेंगे। इससे बाहर आप तभी निकलेंगे जब आपको बहुत बड़ी पॉलिसी मिलने की आशा हो या एक ही जगह से बहुत सी पॉलिसी मिलने वाली हों। ऐसा करने से आप एक ही दिन में अनेक ग्राहकों से मिल सकते हो, नई पॉलिसी के लिए भी और सर्विसिंग के लिए भी। 

टाइम मैनेजमेंट के लिए एक और साधन भी आप अपना सकते हैं। अक्सर बीमा एजेंट को ग्राहक का इंतजार करना पड़ता है, उसके घर या दफ्तर में पहुंचकर इस खाली समय को आप अपनी प्लानिंग करने के लिए, मिलने वाले लोगों की लिस्ट बनाने के लिए, दूसरे कोई और नोट्स बनाने के लिए उपयोग कर सकते हो। इस दौरान आप अपने प्लान के ब्रॉशर या रेडी रेकनर के शुरू वाले पेज पढ़ सकते हो। यह वह समय होता है जब आप कुछ और नहीं कर सकते। इस तरह से आप समय का सदुपयोग भी करेंगे और आपकी बोरियत भी कम होगी।

रिकार्ड कीपिंग

यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण काम है। आप जितनी भी पॉलिसी बेच रहे हैं, उन सब का रिकॉर्ड आपके पास होना चाहिए। रिकॉर्ड से मतलब यह नहीं है कि किस ग्राहक का कौन सा पॉलिसी नंबर था। आपको पता होना चाहिए कि ग्राहक कि उस समय फैमिली हिस्ट्री क्या थी, ऊंचाई और वजन कितना था, आमदनी कितनी थी, वगैरह। साथ ही ग्राहक के हस्ताक्षर का नमूना। कभी ऐसा भी हो सकता है कि 10 साल के बाद ग्राहक भूल जाए कि उसने अंग्रेजी में साइन किए थे या हिंदी में। यदि आप ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी रख पाए तो बहुत उपयुक्त होगा। 

इस सब जानकारी से आपको एक तो लाभ यह होगा कि आप ग्राहक को उसके और उसके बच्चों के जन्मदिन की शुभकामनाएं दे सकते हैं, यदि वह दूसरी पॉलिसी खरीद रहा है और सूचना, अंदाजे से ही दे रहा है तो आप जांच सकते हैं, इससे पहले कि कंपनी का अंडरराइटर नई पुरानी पॉलिसी की सूचना मे विरोधाभास देखकर पॉलिसी नकार दें। 

आपके पास यह भी रिकॉर्ड रहेगा कि कौन ईपॉलिसी कब मैच्योर हो रही है, किसका मनी बैक कब आना है ग्राहक का अता पता और फोन नंबर तो उसमें रहेगा ही। साथ ही यदि कंपनी ने पॉलिसी में कोई गलती कर दी तो आप कंपनी को सबूत दिखा सकते हैं कि आपने तो सब ठीक ही लिखा था। एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि आपको नई पॉलिसी लेते समय ग्राहक से बहुत कम सूचनाएं चाहिए। पुराने फार्म से बहुत ही सूचना मिल जाएगी यह काम ऐसा ही होगा कि किसी टेलर के पास आपको माप दे रखा है आप जाकर सिर्फ कपड़ा दे आते हो शर्ट की सिलाई करने के लिए। 

अनेक एजेंट 20 साल तक भी ग्राहक की डिटेल संभाल कर रखते हैं यदि आप उनमें से हैं तो आपके ग्राहक को विश्वास भी है कि आप वह प्रोफेशनल एजेंट है जो आजीवन इसी काम में रहने के लिए आए हैं।

कुछ भी आपत्ति से परे नही है

कुछ बीमा एजेंटों की शिकायत यह रहती है कि बीमा खरीदते समय लोग बहुत से सवाल पूछते हैं और बहुत सारे ऑब्जेक्शन खड़े करते हैं यह एक सामान्य बात है वास्तव में यदि आप देखें तो दुनिया में कुछ भी बेचना आपत्ति से परे नहीं है यानी ऐसा कोई भी बिक्री नहीं होती है जिसमें सवाल खड़े ना किए जा सकें इसे एक उदाहरण से समझें यदि आप एक कार के सेल्समैन है तो आप देखेंगे कि ग्राहक ऐसी कार खरीदना चाहेंगे जो देखने में बहुत खूबसूरत हो सकती हो कम खर्च में चलती हो अंदर जगह बहुत ज्यादा हो स्टेटस सिंबल हो पार्किंग में जगह कम गिरे वगैरह अब आप सोच कर देखें दुनिया में क्या ऐसी कोई कार है यह हो सकती है जिसमें यह सब खूबियां हो ऐसी कार होना संभव ही नहीं है क्योंकि इसमें जिन गुणों को हम ढूंढ रहे हैं वे परस्पर विरोधी हैं सस्ती कार का स्टेटस सिंबल होना अंदर से ज्यादा जगह होने पर भी पार्किंग में कम जगह घेर ना सब सुविधाएं और लग्जरी फीचर्स होने पर भी देखने का खर्च कम होना बहुत पावरफुल इंजन होने पर भी पेट्रोल का खर्च कम होना आदि ऐसे विरोधाभास हैं जो किसी भी एक कार में संभव नहीं है अब यदि ऐसी आदर्श कार दुनिया में बनी ही नहीं है या बनना संभव ही नहीं है तो ऐसा तो नहीं है कि लोग कार नहीं खरीदते हैं ग्राहक को सब कुछ किसी भी कार में नहीं मिलता है मतलब उसके हाथ से कुछ तो छूटना ही है और जो छूटना है उस पर आपत्ति तो ग्राहक को करनी ही है यदि आप सस्ती छोटे साइज की कार बेचेंगे तो ग्राहक को स्टेटस सिंबल नहीं दिखाई देगा यदि बड़ी कार दिखाएंगे तो पार्किंग की समस्या आड़े आएगी इस स्थिति में ग्राहक को आप उसके चुने हुए गुणों के आधार पर कार भेजते हैं इसका सार यही है कि ग्राहक जो कुछ चाहता है वह सब उसे एक प्रोडक्ट में नहीं मिल सकता है उसे कुछ चीजें छोड़ने ही पड़ेगी और सेल्समेन चाहे किसी भी चीज का हो उसका काम ग्राहक को यही समझाना है कि उसे सब कुछ नहीं मिल सकता ग्राहक के लिए जो बातें जो गुण सबसे महत्वपूर्ण है वह उनके हिसाब से सामान खरीद लेता है बीमा एजेंट के रूप में आप ग्राहक को किसी भी ऐसी चीज का उदाहरण दे सकते हैं जो वह पहले से प्रयोग कर रहा है जैसे की तान्या घड़ी अब घड़ी सस्ती है तो स्टेटस सिंबल नहीं है स्टेटस सिंबल है तो महंगी है यह सिद्धांत वित्तीय चीजों पर भी लागू होता है जब भी कोई व्यक्ति निवेश करना चाहता है तो वह तीन चीजें देखता है पैसे की सुरक्षा लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न वास्तव में दुनिया में ऐसा कोई भी निवेश नहीं है जिसमें तीनों चीजें हो आपके पैसे की सबसे बेहतर सुरक्षा बैंक में फिक्स डिपॉजिट में हो सकती है लेकिन उसमें सबसे कम होगा शेयर मार्केट में पैसा ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है लेकिन वहां पैसे की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती प्रॉपर्टी में पैसे कुछ हद तक हो सकती है और रिटर्न भी आने की संभावना रहती है लेकिन उसमें लिक्विडिटी नहीं होती यानी आप जब चाहे उसे बेचकर पैसा प्राप्त नहीं कर सकते इसका अर्थ है कि ग्राहक को इन तीनों में से कोई एक ही छोड़नी होगी हर ग्राहक अपनी सोच के अनुसार अलग-अलग चीज छोड़ना चाहेगा इसलिए बैंकों में बेहिसाब पैसा फिक्स डिपाजिट में रखा जाता है तो दूसरी और प्रॉपर्टी और शेयर मार्केट में भी लोग खूब निवेश करते हैं इस सारी चर्चा का अर्थ यही है कि कुछ भी खरीदने से पहले ग्राहक गतिरोध उत्पन्न करता ही है क्योंकि जो उसे छोड़ना पड़ रहा है उसे वह आसानी से छोड़ना नहीं चाहता बीमा बेचते हुए इस गतिरोध को सामान्य समझें जितनी बड़ी खरीद उतना बड़ा गतिरोध अक्सर बीमा एजेंट यह शिकायत करते हैं कि जीवन बीमा में ग्राहक निर्णय लेने में बाकी चीजों की अपेक्षा बहुत ज्यादा समय लगाता है दो या तीन बार डालने के बाद ही ग्राहक पॉलिसी लेने का निर्णय लेता है यह बात बिल्कुल सही है और हमें इसका तर्क समझना होगा ग्राहक को जितनी महंगी चीज खरीदनी होती है उतना ही ज्यादा समय वह निर्णय लेने में लगाता है आप जितने समय में एक छोटा केलकुलेटर खरीद लेते हैं उतनी देर में कंप्यूटर नहीं खरीदते आप तो पेस्ट खरीदने में जितना समय लगाते हैं साइकिल खरीदने में उससे ज्यादा समय लगाते हैं कार खरीदने में उससे ज्यादा और मकान खरीदने में उससे भी ज्यादा जहां टूथपेस्ट खरीदने में 10 मिनट लगते हैं वहीं मकान में कुछ महीने या साल भी लग सकते हैं यह सिद्धांत जीवन बीमा पर भी लागू होता है बीमा एजेंट को लगता है कि ग्राहक 20000 का प्रीमियम देने में इतनी आनाकानी कर रहा है ग्राहक के लिए यह निर्णय 20000 का नहीं है यदि उसे 20000 की सालाना किश्त 20 साल तक देनी है तो उसके लिए यह निर्णय ₹400000 का है और इसके लिए वह तुरंत निर्णय नहीं ले सकता इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि जीवन बीमा बेचने में ज्यादा समय और श्रम लगना स्वाभाविक ही है आपके लिए जो पॉलिसी 20000 की है वह ग्राहक के लिए चार लाख की है यदि ग्राहक को आप ऐसी पॉलिसी बेचते बेचते जिसमें उसे एक ही बार ₹20000 देना होता तो है निर्णय लेने में इतना समय नहीं लगा था क्योंकि तब उसके लिए यह 20000 की ही खरीद होती

रिबेट (Rebate)

रिबेट का अर्थ है एजेंट का आपने कमीशन में से एक हिस्सा ग्राहक को देना यह जीवन बीमा के लिए एक खून की तरह है और बहुत ही विवाद का विषय है कानूनन रिबेट लेना और देना दोनों ही अपराध है रिबेट लेने और देने वाले दोनों ही पक्ष के लोगों का स्वार्थ इस से जुड़ा होता है इसलिए कोई इसकी शिकायत नहीं करता है और यह प्रैक्टिस चलती रहती है पहली बात तो यह है कि रिबेट देना या ना देना आपका अपना निर्णय है किसी और का इसमें दखल नहीं हो सकता यह किसी भी और चीज में डिस्काउंट देने जैसा ही है यह बात तय है कि जो दुकानदार कम डिस्काउंट देकर समान बेचता है वह बाकी दुकानदारों से अलग कुछ सेवा ग्राहकों को देता है जो दूसरे दुकानदार नहीं देते उसकी दुकान पर वैरायटी ज्यादा होगी सेल्समैन पढ़े लिखे होंगे सामान घर तक छुड़वाने की सुविधा होगी क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार करता होगा सामान में शिकायत आने पर उसे बदलने में आनाकानी नहीं करेगा आदि आप यदि बिना रैबिट के या कम से कम रेबेट के पॉलिसी बेचना चाहते हैं तो आप अपने अंदर झांक कर देखें कि आप ग्राहक को क्या अलग सर्विस दे रहे हैं जो दूसरे एजेंट नहीं दे रहे हैं क्या आप ज्यादा प्रोफेशनल एजेंट हैं आपकी बीमा के बारे में जानकारी ज्यादा है आपका व्यक्तित्व ज्यादा प्रभावशाली है आप सिर्फ एक पॉलिसी ना बता कर ग्राहक की फाइनेंसियल प्लानिंग कर रहे हैं आप इनकम टैक्स के नियम और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट के बारे में दूसरे एजेंट से ज्यादा जानते हैं आपके पास ग्राहक की पुरानी सब पॉलिसी का रिकॉर्ड है क्या आप लैपटॉप साथ लेकर चलते हैं क्या आप ग्राहक को पहले 1 मिनट में प्रभावित कर सकते हैं यदि आप इन सब मायनों में बाकी एजेंट से अलग है और ग्राहक भी इस बात का अनुभव कर रहा है तो रिबेट का मुद्दा आपकी पॉलिसी के आड़े नहीं आएगा अक्सर समस्या यही रहती है कि हम अपने आपको बाकी एजेंट से अलग नहीं साबित कर पाते और ग्राहक के पास हमें तोलने का एक ही नजरिया रहता है कि हम रिबेट कितनी दे रहे हैं एक उदाहरण ने यदि आपको अपने घर में पेंट करवाना हो तो आप मिस्त्री तलाशने के लिए कहां जाएंगे हर नगर में एक ऐसा चौराहा या बाजार होता है जहां हर सुबह सब मिस्त्री लोग इकट्ठे होते हैं आपके नगर में ऐसी जो भी जगह है आप वही जाएंगे और जो भी सबसे कम रेट मांग रहा है उसे ले आएंगे अपने घर वहां जो भी मिस्त्री खड़ा है वह सिर्फ रेट पर ही बिकता है उसके काम की क्वालिटी हमें मालूम नहीं है अब यदि आपको एक बढ़िया मिस्त्री खोजना है क्योंकि आप की कोठी बहुत महंगी है पेंट भी महंगा ही करवाना है तो कोई भी मिस्त्री नहीं चलेगा आपको मालूम है कि नगर में लालचंद नाम का मिस्त्री बहुत ही बढ़िया है आप उसे खोजते हुए पहुंचते हो और वह कहता है कि 1 महीने तक वह व्यस्त है उसके बाद ही वह आपकी कोठी पर आ सकता है क्या आप उससे यह उम्मीद करेंगे कि वह सबसे सस्ता भी होगा आपके लिए चुनौती यही है कि आप अपने आप को बेहतर दूसरों से अलग एजेंट साबित करें जिससे रिबेट का मुद्दा बहुत बड़ा होकर सामने ना आए यदि आप भीड़ के हिस्से वाले एजेंट है तो आपका मूल्यांकन ऐसे ही होगा कि आप कितनी ज्यादा से ज्यादा रिबेट दे सकते हैं बैंक से मुकाबला आजकल प्रायः सभी बैंक किसी ना किसी कंपनी का बीमा भेजते हैं बैंक में घुसने वाले हर ग्राहक को यह अंदेशा रहता है कि अभी कोई आकर उससे बीमे की बात करेगा यदि आपका कोई ग्राहक बैंक से बीमा लेने की प्लानिंग कर रहा है तो आप उसे समझा सकते हैं कि बैंक में जो अधिकारी आज आपको बीमा बेच रहा है वह पॉलिसी के मैच्योरिटी के समय यहां नहीं होगा और जब वह यहां भी आपकी पॉलिसी की सर्विसिंग जैसे की किस्त जमा करवाना रसीद पहुंचाना लोन दिलवा ना फंड बदलना आदि किसी भी काम में उसकी कोई भूमिका है ही नहीं उसका काम है सिर्फ आपको पॉलिसी बेचना और एक और हो जाना आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि एक बार पॉलिसी लेने के बाद अगले 10 साल तक पॉलिसी का सारा ध्यान उसे ही रखना पड़े या फिर आप जैसे किसी प्रोफेशनल एजेंट से पॉलिसी ले और सदा के लिए निश्चिंत हो जाए बैंक के लोग यह कहकर पॉलिसी बेचते हैं कि अकेला एजेंट तो पता नहीं कब तक एजेंसी चलाएगा पर बैंक तो सदा यही बना रहेगा आप ग्राहक को बताएं कि पॉलिसी की सर्विस बैंक ने नहीं बल्कि बैंक के लोगों ने देनी है 5 साल बाद वहां बैठे मैनेजर की रुचि इस बात में क्यों होगी कि वह आपकी पॉलिसी का ध्यान रखें बैंक हमेशा सर्विसिंग की बात आते ही ग्राहक को बीमा कंपनी के दफ्तर में भेजता भेज देता है। आपकी व्यक्तिगत सेवाओं में और बैंक की सेवा में बहुत अंतर है, ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं।

तकनीक का प्रयोग

आजकल सब मियां कंपनियां कंप्यूटर और तकनीक का प्रयोग करती हैं अक्सर देखा गया है कि ग्राहक को बीमा कंपनी जो सुविधा देती है उनकी उसे जानकारी ही नहीं होती आप का प्रयास यह होना चाहिए कि ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म में ग्राहक का मोबाइल नंबर और ईमेल जरूर लिखें ग्राहक को कष्ट कब जमा करवानी है मनी बैक कब मिलना है आदि अनेक सूचनाएं कंपनियां सीधे ग्राहक को भेजती हैं यदि उनके मोबाइल नंबर और ईमेल कंपनी के पास हो दूसरे सब कंपनी अपने ग्राहकों को सुविधा देती है क एक एजेंट के रूप में आपका कर्तव्य है कि आप ग्राहक के साथ बैठकर उसका पासवर्ड बनवाएं ताकि वह इस तरह की सारी डिटेल खुद ही कंपनी की वेबसाइट पर देख सके साथ ही आप उसे इसका उपयोग करना भी सिखाए आपके पास भी लैपटॉप और ईमेल की सुविधा होनी बहुत जरूरी है आप इसका उपयोग अपने ग्राहकों को उनसे संबंधित कोई भी जानकारी भेजने के लिए कर सकते हैं ईमेल एक बहुत ही सस्ते सुविधा है जिससे आप एक बार में ही सैकड़ों ग्राहकों को कोई सूचना भेज सकते हो यदि उनके पास भी ईमेल है आपकी कोई नई पॉलिसी आई कोई अच्छा बोनस दिया गया कोई प्लान बंद होने वाला है किसी अखबार ने आपके प्लान को या अपनी कंपनी को दूसरों से बेहतर बताया तो आप चाहेंगे कि यह खबर सब ग्राहकों तक पहुंचे ई-मेल से तेज और सस्ता कोई भी संचार माध्यम नहीं है आप अपने ग्राहकों को एक ग्रुप एड्रेस बनाकर रखें और एक बार में ही उन सब को मेल भेजते रहें जब आप अपने ग्राहकों को एक मेल भेजें तो ध्यान रहे कि सबके पति बीसीसी में ही लिखें जिससे उनका दुरुपयोग ना हो सके साथ ही ध्यान रहे कि मेल बहुत भारी ना हो यानी उसमें फोटो वगैरह ना हो मेल इतनी जल्दी-जल्दी भी ना भेजें कि ग्राहक आपके नाम को ब्लॉक कर दे।

रेफ्रेंस (Reference)

जीवन बीमा का बिजनेस है रेफरेंस पर ही चलता है रेफरेंस का अर्थ है किसी ग्राहक से दूसरे संभावित ग्राहक का नाम पूछना यह अत्यधिक महत्वपूर्ण बात है किसी भी एजेंट का अपना जान पहचान का दायरा सीमित ही होता है कोई भी एजेंट हजार लोगों को सीधे नहीं जान सकता है फिर भी आप देखेंगे कि किसी बड़े एजेंट के 2000 ग्राहक हैं यह इसलिए संभव है कि ग्राहकों से उनके परिचितों के रेफरेंस लिए गए एक जानने योग्य बात है कि रेफरेंस आप उन लोगों उन दोनों तरह से लोगों से लैस जिन्होंने आपसे पॉलिसी ली है या नहीं ली यदि कोई ग्राहक आपसे कहता है कि उसे आप अभी पैसे नहीं है कोई दूसरी देनदारी है या उसने पिछले सप्ताह ही नहीं बीमा पॉलिसी खरीदी है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह आपके विरुद्ध है आपके अनुरोध पर वह आपको अपने जानने वाले लोगों के नाम तो दे ही सकता है हो सकता है कि उसका कोई परिचित अभी पॉलिसी लेने की स्थिति में ना हो यदि कोई ग्राहक आपसे कहे कि आप फलां आदमी से बात कर ले लेकिन मेरा नाम ना लें तो बैलेंस नहीं है आप उस ग्राहक से कहें कि यदि मुझे एक अपरिचित आदमी की तरह से बात करनी है तो मैं फोन डायरेक्टरी उठाकर किसी से बात कर ही सकता हूं मुझे तो ऐसे नाम चाहिए जिनसे मैं आपका नाम लेकर बात कर सकूं इस तरह से दिया गया नाम आपके लिए कोल्ड कॉलिंग का डाटा तो हो सकता है रेफरेंस नहीं विश्व प्रसिद्ध सेल्समैन एक जिगलर लिखते हैं कि आप ग्राहक के घर बैठकर उसे कुछ बेच रहे हैं जब है खरीदने की स्थिति में आ जाए तो आप उससे पूछे कि यदि अभी आपका कोई खास मित्र यहां आ जाए तो क्या आप मुझे उस से मिलवा आएंगे मेरा परिचय उससे करवाएंगे पूरी संभावना है कि वह हां कहेगा तब आप उसकी राख से कहे कि आप इसलिए मिल पाएंगे क्योंकि आपको लगता है कि जो सामान आप खरीद रहे हैं उसकी उसे भी जरूरत हो सकती है अब यदि वह दोस्त यहां नहीं आया है तो इससे उसकी जरूरत तो खत्म नहीं हो गई है इसलिए मैं उसके घर जाकर उससे मिल लेता हूं आप मुझे उसका नाम और फोन नंबर दीजिए रेफरेंस लेने के लिए जरूरी है कि ग्राहक को यह विश्वास हो कि जिसका रेफरेंस दिया जा रहा है यह एजेंट उसका अनावश्यक रूप से पीछा करके उसे तंग नहीं करेगा यदि आप किसी को बार-बार पॉलिसी के लिए फोन करेंगे तो वह उसे फोन करके आपकी शिकायत करेगा जिसने आपको उसका रेफरेंस दिया था इसलिए आप रेफरेंस लेते समय ग्राहक को विश्वास दिलाया कि आप उसे मित्र को सिर्फ एक बार फोन करके पूछेंगे कि उसकी आपसे मिलने में रूचि है या नहीं यदि इच्छुक नहीं होगा तो आप बार-बार उसे फोन नहीं करेंगे यदि ग्राहक आपकी इस बात से सहमत हो गया तो फिर आपको कई रेफरेंस मिलने की संभावना है प्रायः ऐसा होता है कि आप ग्राहक से वापस मांगे तो वह कहेगा कि चलिए किसी ने बीमा पॉलिसी के लिए पूछा तो आपका नाम बता दूंगा आप उससे कहे कि यदि आपके किसी मित्र को बीमा पॉलिसी की जरूरत है तो वह आपसे आकर क्यों कहेगा आपसे आज तक किसी ने आकर नहीं कहा होगा कि बीमा चाहिए जिसे बीमा चाहिए उसे मुझ जैसा कोई एजेंट चाहिए इसलिए आपसे अपेक्षा है कि आप मुझे कुछ परिचित लोगों के नाम बता दें जिन्हें मैं ही अपनी ओर से फोन करके पूछ लूंगा कि उनकी कोई बीमा संबंधित जरूरत है क्या इसके बाद ग्राहक आपको बोल सकता है कि अच्छा कुछ नाम सोच कर बताऊंगा प्रायः हर ग्रह के पास मोबाइल फोन होता है जिसमें बहुत से नाम और नंबर डाल रखे होते हैं आप अपने मोबाइल में कोई ऐसा नाम नहीं रखते जिसे आप जानते ना हो गिरा के फोन में जो नाम है वह सब उसके परिचित लोगों के ही हैं इसलिए आप ग्राहक से कहे कि श्रीमान जी आप अपने मोबाइल में से देखकर ही कुछ नाम बताइए ना मान लीजिए कि ग्राहक ने मोबाइल में से देखकर आपको पहला नाम बताया अजय कुमार और उसका नंबर दिया अब आपने पूछा कि यह कहां रहते हैं क्या करते हैं कितना कमाते हैं कितने की पॉलिसी ले सकते हैं आदि अब है आपको और नाम नहीं देगा ग्राहक समझ जाएगा कि आप हर एक नाम के बाद उससे इतने ही सवाल पूछेंगे इसलिए जब ग्राहक आपको नाम और नंबर बता रहा है तो आप और कुछ नहीं पहुंचे जब है आपको जितने नाम देना चाहता है वह दे चुके तब आप उससे पूछें कि अजय कुमार कहां रहते हैं क्या करते हैं आदि अब ग्राहक उन नामों से मुकर नहीं सकता है जो वह पहले ही आपको दे चुका है जितने नाम ग्राहक ने दिए हैं यदि संभव हो तो आप उनमें से कुछ खास लोगों को ग्राहक से फोन करवा दें फोन करने के साथ दिए गए रेफरेंस से वहां आपकी पॉलिसी बिकने की संभावना बहुत बढ़ जाएगी आप ऐसा भी कर सकते हैं कि ग्राहक से पूछे कि इनमें से सबसे पहले किसको फोन करूं संभावना है कि वह ग्राहक आपको कोई एक ऐसा नाम बताएगा और उसको चलने का कारण भी उदाहरण के लिए मैं आपको बता सकता है कि आप राधे रमण को सबसे पहले फोन करें अभी उसका प्रमोशन हुआ है या उसने जमीन बेची है जिसका पैसा उसे निवेश करना है इससे आपको काम और भी आसान हो जाएगा जगजीत लिखते हैं कि जो रेफरेंस आपको मिले हैं उन्हें उसी दिन फोन करें साथ ही फोन करके दो-तीन दिन बाद जो भी स्थिति हो पॉलिसी बीके या ना बीके रेफरेंस देने वाले को जरूर बताएं इससे एक तो उसे लगे लगता है कि उसने जो सहयोग दिया था वह व्यर्थ नहीं गया और एजेंट बहुत होशियार है जो तुरंत ही सब से मिल लिया दूसरा लाभ है कि यदि आपके ग्राहक के घर से निकलने के बाद उसे कोई अन्य नाम याद आ गया हो तो वह आपको अब बता सकता है यह नाम बताने के लिए वह आपको फोन नहीं करेगा लेकिन यदि आपने फोन किया तो वह आपको यह नाम बता देगा कौन ग्राहक आपको रेफरेंस देता है और कौन नहीं या उसकी अपनी आदत और रूचि पर निर्भर करता है यदि किसी ग्राहक ने एक बार आपको चार रेफरेंस दिए हैं तो आप बाद में उसी से और नाम पूछे ऐसा नहीं कि वह केवल चार ही लोगों को जानता है उसके पास और नाम भी हैं और मैं आपको रेफरेंस देखकर मदद नहीं करना चाहता है रेफरेंस कैसे प्रयोग करें जब आप पहले ग्राहक के रेफरेंस से दूसरे के पास गए हो तो बातचीत में तीन चार बार पहले ग्राहक का नाम जरूर लें जो उसका ख़ास दोस्त या रिश्तेदार होगा दूसरा ग्राहक आपको जानता नहीं है परंतु पहले ग्राहक का नाम उसे आपके बारे में आश्वस्त करता है जब आप पहले ग्रह का नाम ले रहे हैं तो उसकी व्यक्तिगत जानकारी दो से ग्राहक को ना दें यदि आप यह बता दें कि पहले ग्राहक ने ₹80000 का चेक दिया है 20 लाख का बीमा खरीदने के लिए तो दूसरे ग्रह को लगता है यह एजेंट अपने ग्राहकों के बारे में ऐसे ही बना दी करता है इसलिए इससे पॉलिसी क्यों यदि खुद पूछे पहले ग्राहक के बारे में तो आप शालीनता से कह दें कि यह प्रोफेशनल एथिक्स हैं जिनके चलते आप एक की जानकारी दूसरे को नहीं देते हो

साइन का महत्व

पॉलिसी लेने के लिए ग्राहक जो प्रपोजल फॉर्म भरता है वह पॉलिसी का आधार होता है ग्राहक और बीमा कंपनी के बीच जो अनुबंध है वही उसी फॉर्म में दी गई जानकारी पर आधारित है कानूनन यह फॉर्म ग्राहक के द्वारा ही भरा जाना चाहिए सामान्यता इस फॉर्म को एजेंट ही भरता है क्योंकि ग्राहक को यह जानकारी नहीं होती कि इसे कैसे भरना है ध्यान रहे कि जब एजेंट इस फॉर्म को ग्राहक के लिए भरता है तो वह कंपनी के एजेंट के तौर पर नहीं बल्कि ग्राहक के एजेंट के तौर पर काम कर रहा होता है फॉर्म के अंत में ग्राहक के द्वारा एक घोषणा की जाती है कि वह इस फॉर्म में सब कुछ सही सही सूचना दे रहा है और वह जानता है कि उसके द्वारा खरीदी जा रही पॉलिसी का आधार इस फॉर्म में दी गई सूचनाएं ही है इस घोषणा में यह भी लिखा होता है कि इसकी सूचनाओं को गलत पाए जाने पर यह पॉलिसी अवैध हो जाएगी और दिया गया प्रीमियम भी जप्त कर लिया जाएगा जब आप एजेंट के रूप में इस फॉर्म को भर रहे होते हैं तो आपको चाहिए कि ग्राहक को इस घोषणा के बारे में बता दें ताकि उसे इस फॉर्म में दी जा रही सूचना का महत्व पता रहे कोई भी ग्राहक जब पॉलिसी लेता है तो उसका मकसद प्रीमियम देना नहीं है मैं चाहता है कि कोई अनहोनी होने पर दिए गए प्रीमियम के बदले में उसके परिवार को बीमा राशि बिना हिचक मिल जाए यदि ग्राहक को पता हो कि उसके द्वारा दी गई गलती गलत जानकारी के आधार पर उसका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है तो वह कभी गलत या अधूरी जानकारी नहीं देगा यदि आपने अपना हित देखते हुए ग्राहक को इस बात से अवगत नहीं करवाया और उसने गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर पॉलिसी ले ली तो आपके लिए दो तरह की समस्या है पहली समस्या तो यह कि यदि क्लेम आया और गलत जानकारी आधार पर रिजेक्ट हो गया तो उस ग्रह का परिवार आपको इसका जिम्मेवार मानेगा दूसरी स्थिति वह है जब ग्राहक के जीते जी कोई दूसरा एजेंट उसे सही जानकारी दे दें दोनों ही स्थित तीनों में लोग आपसे बीमा लेने में कतरा ने लगेंगे किसी भी एजेंट के लिए यह अपने पैस को खत्म करने वाली स्थिति होती है आजकल ज्यादातर बीमा कंपनियां प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी भी पॉलिसी डॉक्युमेंट में लगा कर भेजती हैं अतः यदि आपने फॉर्म में कोई सूचना ग्राहक द्वारा दी गई जानकारी के विपरीत भर्ती फॉर्म बदल कर उस पर ग्राहक के नकली दस्तखत कर दिए तो आप कभी भी पकड़े जा सकते हैं एक और बात आप ग्राहक को बता दें कि यदि वह कोई अधूरी या गलत सूचना फॉर्म में दे रहा है तो उसे इस बात का अहसास होना चाहिए कि भविष्य में कभी क्लेम लेने की नौबत आ गई तो उसकी पत्नी को यह सब सही साबित करना होगा स्वभाविक है उसके लिए सही सूचना देना आसान है बजाय इसके कि उसकी पत्नी को संकट की घड़ी में क्लेम लेने के लिए अदालतों के चक्कर लगाने पड़े इसलिए जरूरी है कि ग्राहक सारी जानकारी ठीक ठीक दे और आप उसे वैसे ही फॉर्म में भरें।

एजेंट के साइन का महत्व

किसी भी जगह हस्ताक्षर करने का अर्थ है कुछ वचन देना जिम्मेवारी लेना जब ग्राहक प्रपोजल फॉर्म भरता है तो उसके साथ आप अपनी गोपनीय एजेंट रिपोर्ट लगाते हैं जिसे एजेंट रिपोर्ट मोरल हजार्ड रिपोर्ट यानी एमएचआर भी कहा जाता है क्या आपने कभी पढ़ा है कि आप जहां साइन कर रहे हैं वहां क्या लिखा है हम अपने जीवन की पहली पॉलिसी बेचने से लेकर अंत तक यह काम करते हैं लेकिन यह नहीं देखते कि हम किस चीज की जिम्मेवारी लेते हुए अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं।

आप कौन से 4 प्लान बेचते हैं

अक्सर देखा गया है कि हर एजेंट तीन या चार प्लान ही भेजता है और उसका 90% भी माइन 4 प्लान में ही आ जाता है यह जरूरी नहीं है कि हर एजेंट वही 4 प्लान बेचता है एक एजेंट के प्लान दूसरे से बिल्कुल अलग हो सकते हैं या दो एक जैसे और दो अलग इसमें कुछ भी गलत नहीं है एक एजेंट सामान्यता वही भेजता है जो उसे पसंद होता है अब आप सोच कर देखें कि यदि आपको 4 प्लान भेजते हो संभव है सैकड़ों पॉलिसी भेज चुके हो पर क्या आपने कभी उन पॉलिसियों का डाक्यूमेंट्स कॉन्ट्रैक्ट पड़ा है यदि आप इसे अच्छे से पड़ेंगे तो पाएंगे कि इनमें अनेक नियम और शर्ते लिखी हैं जो आपको आज तक मालूम ही नहीं थी पॉलिसी लैप्स होने और पुनः चालू करवाने से संबंधित जानकारी ग्रेस पीरियड की जानकारी मेच्योरिटी वैल्यू लेने के विकल्प लोन लेने के विकल्प आदि बहुत सी चीजें वहां इतने विस्तार से होती हैं जितनी बाकी जगह नहीं होती वैसे भी जो प्लान आप इतने आत्मविश्वास से बेच रहे हैं अपने परिचित लोगों को उसके डॉक्यूमेंट को एक बार पढ़ना बनता ही है

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