रिकार्ड कीपिंग

यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण काम है। आप जितनी भी पॉलिसी बेच रहे हैं, उन सब का रिकॉर्ड आपके पास होना चाहिए। रिकॉर्ड से मतलब यह नहीं है कि किस ग्राहक का कौन सा पॉलिसी नंबर था। आपको पता होना चाहिए कि ग्राहक कि उस समय फैमिली हिस्ट्री क्या थी, ऊंचाई और वजन कितना था, आमदनी कितनी थी, वगैरह। साथ ही ग्राहक के हस्ताक्षर का नमूना। कभी ऐसा भी हो सकता है कि 10 साल के बाद ग्राहक भूल जाए कि उसने अंग्रेजी में साइन किए थे या हिंदी में। यदि आप ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी रख पाए तो बहुत उपयुक्त होगा। 

इस सब जानकारी से आपको एक तो लाभ यह होगा कि आप ग्राहक को उसके और उसके बच्चों के जन्मदिन की शुभकामनाएं दे सकते हैं, यदि वह दूसरी पॉलिसी खरीद रहा है और सूचना, अंदाजे से ही दे रहा है तो आप जांच सकते हैं, इससे पहले कि कंपनी का अंडरराइटर नई पुरानी पॉलिसी की सूचना मे विरोधाभास देखकर पॉलिसी नकार दें। 

आपके पास यह भी रिकॉर्ड रहेगा कि कौन ईपॉलिसी कब मैच्योर हो रही है, किसका मनी बैक कब आना है ग्राहक का अता पता और फोन नंबर तो उसमें रहेगा ही। साथ ही यदि कंपनी ने पॉलिसी में कोई गलती कर दी तो आप कंपनी को सबूत दिखा सकते हैं कि आपने तो सब ठीक ही लिखा था। एक और महत्वपूर्ण लाभ यह है कि आपको नई पॉलिसी लेते समय ग्राहक से बहुत कम सूचनाएं चाहिए। पुराने फार्म से बहुत ही सूचना मिल जाएगी यह काम ऐसा ही होगा कि किसी टेलर के पास आपको माप दे रखा है आप जाकर सिर्फ कपड़ा दे आते हो शर्ट की सिलाई करने के लिए। 

अनेक एजेंट 20 साल तक भी ग्राहक की डिटेल संभाल कर रखते हैं यदि आप उनमें से हैं तो आपके ग्राहक को विश्वास भी है कि आप वह प्रोफेशनल एजेंट है जो आजीवन इसी काम में रहने के लिए आए हैं।

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