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कुछ भी आपत्ति से परे नही है
कुछ बीमा एजेंटों की शिकायत यह रहती है कि बीमा खरीदते समय लोग बहुत से सवाल पूछते हैं और बहुत सारे ऑब्जेक्शन खड़े करते हैं यह एक सामान्य बात है वास्तव में यदि आप देखें तो दुनिया में कुछ भी बेचना आपत्ति से परे नहीं है यानी ऐसा कोई भी बिक्री नहीं होती है जिसमें सवाल खड़े ना किए जा सकें इसे एक उदाहरण से समझें यदि आप एक कार के सेल्समैन है तो आप देखेंगे कि ग्राहक ऐसी कार खरीदना चाहेंगे जो देखने में बहुत खूबसूरत हो सकती हो कम खर्च में चलती हो अंदर जगह बहुत ज्यादा हो स्टेटस सिंबल हो पार्किंग में जगह कम गिरे वगैरह अब आप सोच कर देखें दुनिया में क्या ऐसी कोई कार है यह हो सकती है जिसमें यह सब खूबियां हो ऐसी कार होना संभव ही नहीं है क्योंकि इसमें जिन गुणों को हम ढूंढ रहे हैं वे परस्पर विरोधी हैं सस्ती कार का स्टेटस सिंबल होना अंदर से ज्यादा जगह होने पर भी पार्किंग में कम जगह घेर ना सब सुविधाएं और लग्जरी फीचर्स होने पर भी देखने का खर्च कम होना बहुत पावरफुल इंजन होने पर भी पेट्रोल का खर्च कम होना आदि ऐसे विरोधाभास हैं जो किसी भी एक कार में संभव नहीं है अब यदि ऐसी आदर्श कार दुनिया में बनी ही नहीं है या बनना संभव ही नहीं है तो ऐसा तो नहीं है कि लोग कार नहीं खरीदते हैं ग्राहक को सब कुछ किसी भी कार में नहीं मिलता है मतलब उसके हाथ से कुछ तो छूटना ही है और जो छूटना है उस पर आपत्ति तो ग्राहक को करनी ही है यदि आप सस्ती छोटे साइज की कार बेचेंगे तो ग्राहक को स्टेटस सिंबल नहीं दिखाई देगा यदि बड़ी कार दिखाएंगे तो पार्किंग की समस्या आड़े आएगी इस स्थिति में ग्राहक को आप उसके चुने हुए गुणों के आधार पर कार भेजते हैं इसका सार यही है कि ग्राहक जो कुछ चाहता है वह सब उसे एक प्रोडक्ट में नहीं मिल सकता है उसे कुछ चीजें छोड़ने ही पड़ेगी और सेल्समेन चाहे किसी भी चीज का हो उसका काम ग्राहक को यही समझाना है कि उसे सब कुछ नहीं मिल सकता ग्राहक के लिए जो बातें जो गुण सबसे महत्वपूर्ण है वह उनके हिसाब से सामान खरीद लेता है बीमा एजेंट के रूप में आप ग्राहक को किसी भी ऐसी चीज का उदाहरण दे सकते हैं जो वह पहले से प्रयोग कर रहा है जैसे की तान्या घड़ी अब घड़ी सस्ती है तो स्टेटस सिंबल नहीं है स्टेटस सिंबल है तो महंगी है यह सिद्धांत वित्तीय चीजों पर भी लागू होता है जब भी कोई व्यक्ति निवेश करना चाहता है तो वह तीन चीजें देखता है पैसे की सुरक्षा लिक्विडिटी और बेहतर रिटर्न वास्तव में दुनिया में ऐसा कोई भी निवेश नहीं है जिसमें तीनों चीजें हो आपके पैसे की सबसे बेहतर सुरक्षा बैंक में फिक्स डिपॉजिट में हो सकती है लेकिन उसमें सबसे कम होगा शेयर मार्केट में पैसा ज्यादा तेजी से बढ़ सकता है लेकिन वहां पैसे की सुरक्षा की गारंटी नहीं होती प्रॉपर्टी में पैसे कुछ हद तक हो सकती है और रिटर्न भी आने की संभावना रहती है लेकिन उसमें लिक्विडिटी नहीं होती यानी आप जब चाहे उसे बेचकर पैसा प्राप्त नहीं कर सकते इसका अर्थ है कि ग्राहक को इन तीनों में से कोई एक ही छोड़नी होगी हर ग्राहक अपनी सोच के अनुसार अलग-अलग चीज छोड़ना चाहेगा इसलिए बैंकों में बेहिसाब पैसा फिक्स डिपाजिट में रखा जाता है तो दूसरी और प्रॉपर्टी और शेयर मार्केट में भी लोग खूब निवेश करते हैं इस सारी चर्चा का अर्थ यही है कि कुछ भी खरीदने से पहले ग्राहक गतिरोध उत्पन्न करता ही है क्योंकि जो उसे छोड़ना पड़ रहा है उसे वह आसानी से छोड़ना नहीं चाहता बीमा बेचते हुए इस गतिरोध को सामान्य समझें जितनी बड़ी खरीद उतना बड़ा गतिरोध अक्सर बीमा एजेंट यह शिकायत करते हैं कि जीवन बीमा में ग्राहक निर्णय लेने में बाकी चीजों की अपेक्षा बहुत ज्यादा समय लगाता है दो या तीन बार डालने के बाद ही ग्राहक पॉलिसी लेने का निर्णय लेता है यह बात बिल्कुल सही है और हमें इसका तर्क समझना होगा ग्राहक को जितनी महंगी चीज खरीदनी होती है उतना ही ज्यादा समय वह निर्णय लेने में लगाता है आप जितने समय में एक छोटा केलकुलेटर खरीद लेते हैं उतनी देर में कंप्यूटर नहीं खरीदते आप तो पेस्ट खरीदने में जितना समय लगाते हैं साइकिल खरीदने में उससे ज्यादा समय लगाते हैं कार खरीदने में उससे ज्यादा और मकान खरीदने में उससे भी ज्यादा जहां टूथपेस्ट खरीदने में 10 मिनट लगते हैं वहीं मकान में कुछ महीने या साल भी लग सकते हैं यह सिद्धांत जीवन बीमा पर भी लागू होता है बीमा एजेंट को लगता है कि ग्राहक 20000 का प्रीमियम देने में इतनी आनाकानी कर रहा है ग्राहक के लिए यह निर्णय 20000 का नहीं है यदि उसे 20000 की सालाना किश्त 20 साल तक देनी है तो उसके लिए यह निर्णय ₹400000 का है और इसके लिए वह तुरंत निर्णय नहीं ले सकता इस चर्चा से यह स्पष्ट है कि जीवन बीमा बेचने में ज्यादा समय और श्रम लगना स्वाभाविक ही है आपके लिए जो पॉलिसी 20000 की है वह ग्राहक के लिए चार लाख की है यदि ग्राहक को आप ऐसी पॉलिसी बेचते बेचते जिसमें उसे एक ही बार ₹20000 देना होता तो है निर्णय लेने में इतना समय नहीं लगा था क्योंकि तब उसके लिए यह 20000 की ही खरीद होती
रिबेट (Rebate)
रिबेट का अर्थ है एजेंट का आपने कमीशन में से एक हिस्सा ग्राहक को देना यह जीवन बीमा के लिए एक खून की तरह है और बहुत ही विवाद का विषय है कानूनन रिबेट लेना और देना दोनों ही अपराध है रिबेट लेने और देने वाले दोनों ही पक्ष के लोगों का स्वार्थ इस से जुड़ा होता है इसलिए कोई इसकी शिकायत नहीं करता है और यह प्रैक्टिस चलती रहती है पहली बात तो यह है कि रिबेट देना या ना देना आपका अपना निर्णय है किसी और का इसमें दखल नहीं हो सकता यह किसी भी और चीज में डिस्काउंट देने जैसा ही है यह बात तय है कि जो दुकानदार कम डिस्काउंट देकर समान बेचता है वह बाकी दुकानदारों से अलग कुछ सेवा ग्राहकों को देता है जो दूसरे दुकानदार नहीं देते उसकी दुकान पर वैरायटी ज्यादा होगी सेल्समैन पढ़े लिखे होंगे सामान घर तक छुड़वाने की सुविधा होगी क्रेडिट कार्ड भी स्वीकार करता होगा सामान में शिकायत आने पर उसे बदलने में आनाकानी नहीं करेगा आदि आप यदि बिना रैबिट के या कम से कम रेबेट के पॉलिसी बेचना चाहते हैं तो आप अपने अंदर झांक कर देखें कि आप ग्राहक को क्या अलग सर्विस दे रहे हैं जो दूसरे एजेंट नहीं दे रहे हैं क्या आप ज्यादा प्रोफेशनल एजेंट हैं आपकी बीमा के बारे में जानकारी ज्यादा है आपका व्यक्तित्व ज्यादा प्रभावशाली है आप सिर्फ एक पॉलिसी ना बता कर ग्राहक की फाइनेंसियल प्लानिंग कर रहे हैं आप इनकम टैक्स के नियम और दूसरे फाइनेंशियल प्रोडक्ट के बारे में दूसरे एजेंट से ज्यादा जानते हैं आपके पास ग्राहक की पुरानी सब पॉलिसी का रिकॉर्ड है क्या आप लैपटॉप साथ लेकर चलते हैं क्या आप ग्राहक को पहले 1 मिनट में प्रभावित कर सकते हैं यदि आप इन सब मायनों में बाकी एजेंट से अलग है और ग्राहक भी इस बात का अनुभव कर रहा है तो रिबेट का मुद्दा आपकी पॉलिसी के आड़े नहीं आएगा अक्सर समस्या यही रहती है कि हम अपने आपको बाकी एजेंट से अलग नहीं साबित कर पाते और ग्राहक के पास हमें तोलने का एक ही नजरिया रहता है कि हम रिबेट कितनी दे रहे हैं एक उदाहरण ने यदि आपको अपने घर में पेंट करवाना हो तो आप मिस्त्री तलाशने के लिए कहां जाएंगे हर नगर में एक ऐसा चौराहा या बाजार होता है जहां हर सुबह सब मिस्त्री लोग इकट्ठे होते हैं आपके नगर में ऐसी जो भी जगह है आप वही जाएंगे और जो भी सबसे कम रेट मांग रहा है उसे ले आएंगे अपने घर वहां जो भी मिस्त्री खड़ा है वह सिर्फ रेट पर ही बिकता है उसके काम की क्वालिटी हमें मालूम नहीं है अब यदि आपको एक बढ़िया मिस्त्री खोजना है क्योंकि आप की कोठी बहुत महंगी है पेंट भी महंगा ही करवाना है तो कोई भी मिस्त्री नहीं चलेगा आपको मालूम है कि नगर में लालचंद नाम का मिस्त्री बहुत ही बढ़िया है आप उसे खोजते हुए पहुंचते हो और वह कहता है कि 1 महीने तक वह व्यस्त है उसके बाद ही वह आपकी कोठी पर आ सकता है क्या आप उससे यह उम्मीद करेंगे कि वह सबसे सस्ता भी होगा आपके लिए चुनौती यही है कि आप अपने आप को बेहतर दूसरों से अलग एजेंट साबित करें जिससे रिबेट का मुद्दा बहुत बड़ा होकर सामने ना आए यदि आप भीड़ के हिस्से वाले एजेंट है तो आपका मूल्यांकन ऐसे ही होगा कि आप कितनी ज्यादा से ज्यादा रिबेट दे सकते हैं बैंक से मुकाबला आजकल प्रायः सभी बैंक किसी ना किसी कंपनी का बीमा भेजते हैं बैंक में घुसने वाले हर ग्राहक को यह अंदेशा रहता है कि अभी कोई आकर उससे बीमे की बात करेगा यदि आपका कोई ग्राहक बैंक से बीमा लेने की प्लानिंग कर रहा है तो आप उसे समझा सकते हैं कि बैंक में जो अधिकारी आज आपको बीमा बेच रहा है वह पॉलिसी के मैच्योरिटी के समय यहां नहीं होगा और जब वह यहां भी आपकी पॉलिसी की सर्विसिंग जैसे की किस्त जमा करवाना रसीद पहुंचाना लोन दिलवा ना फंड बदलना आदि किसी भी काम में उसकी कोई भूमिका है ही नहीं उसका काम है सिर्फ आपको पॉलिसी बेचना और एक और हो जाना आप ग्राहक से पूछे कि क्या वह चाहेगा कि एक बार पॉलिसी लेने के बाद अगले 10 साल तक पॉलिसी का सारा ध्यान उसे ही रखना पड़े या फिर आप जैसे किसी प्रोफेशनल एजेंट से पॉलिसी ले और सदा के लिए निश्चिंत हो जाए बैंक के लोग यह कहकर पॉलिसी बेचते हैं कि अकेला एजेंट तो पता नहीं कब तक एजेंसी चलाएगा पर बैंक तो सदा यही बना रहेगा आप ग्राहक को बताएं कि पॉलिसी की सर्विस बैंक ने नहीं बल्कि बैंक के लोगों ने देनी है 5 साल बाद वहां बैठे मैनेजर की रुचि इस बात में क्यों होगी कि वह आपकी पॉलिसी का ध्यान रखें बैंक हमेशा सर्विसिंग की बात आते ही ग्राहक को बीमा कंपनी के दफ्तर में भेजता भेज देता है। आपकी व्यक्तिगत सेवाओं में और बैंक की सेवा में बहुत अंतर है, ग्राहक को इस बात का एहसास करवाएं।
तकनीक का प्रयोग
आजकल सब मियां कंपनियां कंप्यूटर और तकनीक का प्रयोग करती हैं अक्सर देखा गया है कि ग्राहक को बीमा कंपनी जो सुविधा देती है उनकी उसे जानकारी ही नहीं होती आप का प्रयास यह होना चाहिए कि ग्राहक के प्रपोजल फॉर्म में ग्राहक का मोबाइल नंबर और ईमेल जरूर लिखें ग्राहक को कष्ट कब जमा करवानी है मनी बैक कब मिलना है आदि अनेक सूचनाएं कंपनियां सीधे ग्राहक को भेजती हैं यदि उनके मोबाइल नंबर और ईमेल कंपनी के पास हो दूसरे सब कंपनी अपने ग्राहकों को सुविधा देती है क एक एजेंट के रूप में आपका कर्तव्य है कि आप ग्राहक के साथ बैठकर उसका पासवर्ड बनवाएं ताकि वह इस तरह की सारी डिटेल खुद ही कंपनी की वेबसाइट पर देख सके साथ ही आप उसे इसका उपयोग करना भी सिखाए आपके पास भी लैपटॉप और ईमेल की सुविधा होनी बहुत जरूरी है आप इसका उपयोग अपने ग्राहकों को उनसे संबंधित कोई भी जानकारी भेजने के लिए कर सकते हैं ईमेल एक बहुत ही सस्ते सुविधा है जिससे आप एक बार में ही सैकड़ों ग्राहकों को कोई सूचना भेज सकते हो यदि उनके पास भी ईमेल है आपकी कोई नई पॉलिसी आई कोई अच्छा बोनस दिया गया कोई प्लान बंद होने वाला है किसी अखबार ने आपके प्लान को या अपनी कंपनी को दूसरों से बेहतर बताया तो आप चाहेंगे कि यह खबर सब ग्राहकों तक पहुंचे ई-मेल से तेज और सस्ता कोई भी संचार माध्यम नहीं है आप अपने ग्राहकों को एक ग्रुप एड्रेस बनाकर रखें और एक बार में ही उन सब को मेल भेजते रहें जब आप अपने ग्राहकों को एक मेल भेजें तो ध्यान रहे कि सबके पति बीसीसी में ही लिखें जिससे उनका दुरुपयोग ना हो सके साथ ही ध्यान रहे कि मेल बहुत भारी ना हो यानी उसमें फोटो वगैरह ना हो मेल इतनी जल्दी-जल्दी भी ना भेजें कि ग्राहक आपके नाम को ब्लॉक कर दे।
रेफ्रेंस (Reference)
जीवन बीमा का बिजनेस है रेफरेंस पर ही चलता है रेफरेंस का अर्थ है किसी ग्राहक से दूसरे संभावित ग्राहक का नाम पूछना यह अत्यधिक महत्वपूर्ण बात है किसी भी एजेंट का अपना जान पहचान का दायरा सीमित ही होता है कोई भी एजेंट हजार लोगों को सीधे नहीं जान सकता है फिर भी आप देखेंगे कि किसी बड़े एजेंट के 2000 ग्राहक हैं यह इसलिए संभव है कि ग्राहकों से उनके परिचितों के रेफरेंस लिए गए एक जानने योग्य बात है कि रेफरेंस आप उन लोगों उन दोनों तरह से लोगों से लैस जिन्होंने आपसे पॉलिसी ली है या नहीं ली यदि कोई ग्राहक आपसे कहता है कि उसे आप अभी पैसे नहीं है कोई दूसरी देनदारी है या उसने पिछले सप्ताह ही नहीं बीमा पॉलिसी खरीदी है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि वह आपके विरुद्ध है आपके अनुरोध पर वह आपको अपने जानने वाले लोगों के नाम तो दे ही सकता है हो सकता है कि उसका कोई परिचित अभी पॉलिसी लेने की स्थिति में ना हो यदि कोई ग्राहक आपसे कहे कि आप फलां आदमी से बात कर ले लेकिन मेरा नाम ना लें तो बैलेंस नहीं है आप उस ग्राहक से कहें कि यदि मुझे एक अपरिचित आदमी की तरह से बात करनी है तो मैं फोन डायरेक्टरी उठाकर किसी से बात कर ही सकता हूं मुझे तो ऐसे नाम चाहिए जिनसे मैं आपका नाम लेकर बात कर सकूं इस तरह से दिया गया नाम आपके लिए कोल्ड कॉलिंग का डाटा तो हो सकता है रेफरेंस नहीं विश्व प्रसिद्ध सेल्समैन एक जिगलर लिखते हैं कि आप ग्राहक के घर बैठकर उसे कुछ बेच रहे हैं जब है खरीदने की स्थिति में आ जाए तो आप उससे पूछे कि यदि अभी आपका कोई खास मित्र यहां आ जाए तो क्या आप मुझे उस से मिलवा आएंगे मेरा परिचय उससे करवाएंगे पूरी संभावना है कि वह हां कहेगा तब आप उसकी राख से कहे कि आप इसलिए मिल पाएंगे क्योंकि आपको लगता है कि जो सामान आप खरीद रहे हैं उसकी उसे भी जरूरत हो सकती है अब यदि वह दोस्त यहां नहीं आया है तो इससे उसकी जरूरत तो खत्म नहीं हो गई है इसलिए मैं उसके घर जाकर उससे मिल लेता हूं आप मुझे उसका नाम और फोन नंबर दीजिए रेफरेंस लेने के लिए जरूरी है कि ग्राहक को यह विश्वास हो कि जिसका रेफरेंस दिया जा रहा है यह एजेंट उसका अनावश्यक रूप से पीछा करके उसे तंग नहीं करेगा यदि आप किसी को बार-बार पॉलिसी के लिए फोन करेंगे तो वह उसे फोन करके आपकी शिकायत करेगा जिसने आपको उसका रेफरेंस दिया था इसलिए आप रेफरेंस लेते समय ग्राहक को विश्वास दिलाया कि आप उसे मित्र को सिर्फ एक बार फोन करके पूछेंगे कि उसकी आपसे मिलने में रूचि है या नहीं यदि इच्छुक नहीं होगा तो आप बार-बार उसे फोन नहीं करेंगे यदि ग्राहक आपकी इस बात से सहमत हो गया तो फिर आपको कई रेफरेंस मिलने की संभावना है प्रायः ऐसा होता है कि आप ग्राहक से वापस मांगे तो वह कहेगा कि चलिए किसी ने बीमा पॉलिसी के लिए पूछा तो आपका नाम बता दूंगा आप उससे कहे कि यदि आपके किसी मित्र को बीमा पॉलिसी की जरूरत है तो वह आपसे आकर क्यों कहेगा आपसे आज तक किसी ने आकर नहीं कहा होगा कि बीमा चाहिए जिसे बीमा चाहिए उसे मुझ जैसा कोई एजेंट चाहिए इसलिए आपसे अपेक्षा है कि आप मुझे कुछ परिचित लोगों के नाम बता दें जिन्हें मैं ही अपनी ओर से फोन करके पूछ लूंगा कि उनकी कोई बीमा संबंधित जरूरत है क्या इसके बाद ग्राहक आपको बोल सकता है कि अच्छा कुछ नाम सोच कर बताऊंगा प्रायः हर ग्रह के पास मोबाइल फोन होता है जिसमें बहुत से नाम और नंबर डाल रखे होते हैं आप अपने मोबाइल में कोई ऐसा नाम नहीं रखते जिसे आप जानते ना हो गिरा के फोन में जो नाम है वह सब उसके परिचित लोगों के ही हैं इसलिए आप ग्राहक से कहे कि श्रीमान जी आप अपने मोबाइल में से देखकर ही कुछ नाम बताइए ना मान लीजिए कि ग्राहक ने मोबाइल में से देखकर आपको पहला नाम बताया अजय कुमार और उसका नंबर दिया अब आपने पूछा कि यह कहां रहते हैं क्या करते हैं कितना कमाते हैं कितने की पॉलिसी ले सकते हैं आदि अब है आपको और नाम नहीं देगा ग्राहक समझ जाएगा कि आप हर एक नाम के बाद उससे इतने ही सवाल पूछेंगे इसलिए जब ग्राहक आपको नाम और नंबर बता रहा है तो आप और कुछ नहीं पहुंचे जब है आपको जितने नाम देना चाहता है वह दे चुके तब आप उससे पूछें कि अजय कुमार कहां रहते हैं क्या करते हैं आदि अब ग्राहक उन नामों से मुकर नहीं सकता है जो वह पहले ही आपको दे चुका है जितने नाम ग्राहक ने दिए हैं यदि संभव हो तो आप उनमें से कुछ खास लोगों को ग्राहक से फोन करवा दें फोन करने के साथ दिए गए रेफरेंस से वहां आपकी पॉलिसी बिकने की संभावना बहुत बढ़ जाएगी आप ऐसा भी कर सकते हैं कि ग्राहक से पूछे कि इनमें से सबसे पहले किसको फोन करूं संभावना है कि वह ग्राहक आपको कोई एक ऐसा नाम बताएगा और उसको चलने का कारण भी उदाहरण के लिए मैं आपको बता सकता है कि आप राधे रमण को सबसे पहले फोन करें अभी उसका प्रमोशन हुआ है या उसने जमीन बेची है जिसका पैसा उसे निवेश करना है इससे आपको काम और भी आसान हो जाएगा जगजीत लिखते हैं कि जो रेफरेंस आपको मिले हैं उन्हें उसी दिन फोन करें साथ ही फोन करके दो-तीन दिन बाद जो भी स्थिति हो पॉलिसी बीके या ना बीके रेफरेंस देने वाले को जरूर बताएं इससे एक तो उसे लगे लगता है कि उसने जो सहयोग दिया था वह व्यर्थ नहीं गया और एजेंट बहुत होशियार है जो तुरंत ही सब से मिल लिया दूसरा लाभ है कि यदि आपके ग्राहक के घर से निकलने के बाद उसे कोई अन्य नाम याद आ गया हो तो वह आपको अब बता सकता है यह नाम बताने के लिए वह आपको फोन नहीं करेगा लेकिन यदि आपने फोन किया तो वह आपको यह नाम बता देगा कौन ग्राहक आपको रेफरेंस देता है और कौन नहीं या उसकी अपनी आदत और रूचि पर निर्भर करता है यदि किसी ग्राहक ने एक बार आपको चार रेफरेंस दिए हैं तो आप बाद में उसी से और नाम पूछे ऐसा नहीं कि वह केवल चार ही लोगों को जानता है उसके पास और नाम भी हैं और मैं आपको रेफरेंस देखकर मदद नहीं करना चाहता है रेफरेंस कैसे प्रयोग करें जब आप पहले ग्राहक के रेफरेंस से दूसरे के पास गए हो तो बातचीत में तीन चार बार पहले ग्राहक का नाम जरूर लें जो उसका ख़ास दोस्त या रिश्तेदार होगा दूसरा ग्राहक आपको जानता नहीं है परंतु पहले ग्राहक का नाम उसे आपके बारे में आश्वस्त करता है जब आप पहले ग्रह का नाम ले रहे हैं तो उसकी व्यक्तिगत जानकारी दो से ग्राहक को ना दें यदि आप यह बता दें कि पहले ग्राहक ने ₹80000 का चेक दिया है 20 लाख का बीमा खरीदने के लिए तो दूसरे ग्रह को लगता है यह एजेंट अपने ग्राहकों के बारे में ऐसे ही बना दी करता है इसलिए इससे पॉलिसी क्यों यदि खुद पूछे पहले ग्राहक के बारे में तो आप शालीनता से कह दें कि यह प्रोफेशनल एथिक्स हैं जिनके चलते आप एक की जानकारी दूसरे को नहीं देते हो
साइन का महत्व
पॉलिसी लेने के लिए ग्राहक जो प्रपोजल फॉर्म भरता है वह पॉलिसी का आधार होता है ग्राहक और बीमा कंपनी के बीच जो अनुबंध है वही उसी फॉर्म में दी गई जानकारी पर आधारित है कानूनन यह फॉर्म ग्राहक के द्वारा ही भरा जाना चाहिए सामान्यता इस फॉर्म को एजेंट ही भरता है क्योंकि ग्राहक को यह जानकारी नहीं होती कि इसे कैसे भरना है ध्यान रहे कि जब एजेंट इस फॉर्म को ग्राहक के लिए भरता है तो वह कंपनी के एजेंट के तौर पर नहीं बल्कि ग्राहक के एजेंट के तौर पर काम कर रहा होता है फॉर्म के अंत में ग्राहक के द्वारा एक घोषणा की जाती है कि वह इस फॉर्म में सब कुछ सही सही सूचना दे रहा है और वह जानता है कि उसके द्वारा खरीदी जा रही पॉलिसी का आधार इस फॉर्म में दी गई सूचनाएं ही है इस घोषणा में यह भी लिखा होता है कि इसकी सूचनाओं को गलत पाए जाने पर यह पॉलिसी अवैध हो जाएगी और दिया गया प्रीमियम भी जप्त कर लिया जाएगा जब आप एजेंट के रूप में इस फॉर्म को भर रहे होते हैं तो आपको चाहिए कि ग्राहक को इस घोषणा के बारे में बता दें ताकि उसे इस फॉर्म में दी जा रही सूचना का महत्व पता रहे कोई भी ग्राहक जब पॉलिसी लेता है तो उसका मकसद प्रीमियम देना नहीं है मैं चाहता है कि कोई अनहोनी होने पर दिए गए प्रीमियम के बदले में उसके परिवार को बीमा राशि बिना हिचक मिल जाए यदि ग्राहक को पता हो कि उसके द्वारा दी गई गलती गलत जानकारी के आधार पर उसका क्लेम रिजेक्ट हो सकता है तो वह कभी गलत या अधूरी जानकारी नहीं देगा यदि आपने अपना हित देखते हुए ग्राहक को इस बात से अवगत नहीं करवाया और उसने गलत या अधूरी जानकारी के आधार पर पॉलिसी ले ली तो आपके लिए दो तरह की समस्या है पहली समस्या तो यह कि यदि क्लेम आया और गलत जानकारी आधार पर रिजेक्ट हो गया तो उस ग्रह का परिवार आपको इसका जिम्मेवार मानेगा दूसरी स्थिति वह है जब ग्राहक के जीते जी कोई दूसरा एजेंट उसे सही जानकारी दे दें दोनों ही स्थित तीनों में लोग आपसे बीमा लेने में कतरा ने लगेंगे किसी भी एजेंट के लिए यह अपने पैस को खत्म करने वाली स्थिति होती है आजकल ज्यादातर बीमा कंपनियां प्रपोजल फॉर्म की फोटो कॉपी भी पॉलिसी डॉक्युमेंट में लगा कर भेजती हैं अतः यदि आपने फॉर्म में कोई सूचना ग्राहक द्वारा दी गई जानकारी के विपरीत भर्ती फॉर्म बदल कर उस पर ग्राहक के नकली दस्तखत कर दिए तो आप कभी भी पकड़े जा सकते हैं एक और बात आप ग्राहक को बता दें कि यदि वह कोई अधूरी या गलत सूचना फॉर्म में दे रहा है तो उसे इस बात का अहसास होना चाहिए कि भविष्य में कभी क्लेम लेने की नौबत आ गई तो उसकी पत्नी को यह सब सही साबित करना होगा स्वभाविक है उसके लिए सही सूचना देना आसान है बजाय इसके कि उसकी पत्नी को संकट की घड़ी में क्लेम लेने के लिए अदालतों के चक्कर लगाने पड़े इसलिए जरूरी है कि ग्राहक सारी जानकारी ठीक ठीक दे और आप उसे वैसे ही फॉर्म में भरें।
एजेंट के साइन का महत्व
किसी भी जगह हस्ताक्षर करने का अर्थ है कुछ वचन देना जिम्मेवारी लेना जब ग्राहक प्रपोजल फॉर्म भरता है तो उसके साथ आप अपनी गोपनीय एजेंट रिपोर्ट लगाते हैं जिसे एजेंट रिपोर्ट मोरल हजार्ड रिपोर्ट यानी एमएचआर भी कहा जाता है क्या आपने कभी पढ़ा है कि आप जहां साइन कर रहे हैं वहां क्या लिखा है हम अपने जीवन की पहली पॉलिसी बेचने से लेकर अंत तक यह काम करते हैं लेकिन यह नहीं देखते कि हम किस चीज की जिम्मेवारी लेते हुए अपने हस्ताक्षर कर रहे हैं।
आप कौन से 4 प्लान बेचते हैं
अक्सर देखा गया है कि हर एजेंट तीन या चार प्लान ही भेजता है और उसका 90% भी माइन 4 प्लान में ही आ जाता है यह जरूरी नहीं है कि हर एजेंट वही 4 प्लान बेचता है एक एजेंट के प्लान दूसरे से बिल्कुल अलग हो सकते हैं या दो एक जैसे और दो अलग इसमें कुछ भी गलत नहीं है एक एजेंट सामान्यता वही भेजता है जो उसे पसंद होता है अब आप सोच कर देखें कि यदि आपको 4 प्लान भेजते हो संभव है सैकड़ों पॉलिसी भेज चुके हो पर क्या आपने कभी उन पॉलिसियों का डाक्यूमेंट्स कॉन्ट्रैक्ट पड़ा है यदि आप इसे अच्छे से पड़ेंगे तो पाएंगे कि इनमें अनेक नियम और शर्ते लिखी हैं जो आपको आज तक मालूम ही नहीं थी पॉलिसी लैप्स होने और पुनः चालू करवाने से संबंधित जानकारी ग्रेस पीरियड की जानकारी मेच्योरिटी वैल्यू लेने के विकल्प लोन लेने के विकल्प आदि बहुत सी चीजें वहां इतने विस्तार से होती हैं जितनी बाकी जगह नहीं होती वैसे भी जो प्लान आप इतने आत्मविश्वास से बेच रहे हैं अपने परिचित लोगों को उसके डॉक्यूमेंट को एक बार पढ़ना बनता ही है
बिजनेस की प्लानिंग
एजेंट सामान्य था अकेले काम करता है उसे यह अंदाजा नहीं होता कि कंपनियों में किस तरह से बिजनेस प्लैनिंग की जाती है इसीलिए अक्सर बीमा एजेंट अपने बीमा की प्लानिंग नहीं करते प्लानिंग यह तय करने के लिए होती है कि हमें कहां तक पहुंचना है कब तक पहुंचना है और कैसे पहुंचना है एक बीमा एजेंट के लिए जरूरी है कि वह तय करेगी उसे कहां तक पहुंचना है यानी वह अपना लक्ष्य निर्धारित करें लक्ष्य इस प्रकार से हो सकता है कि उसे 1 वर्ष में 100 पॉलिसी बेचनी है या 20 लाख का प्रीमियम करना है या अमुक क्लब के लिए क्वालीफाई करना है या एमडीआरटी करना है कहने का अर्थ यह है कि आपको यह तय करना है कि कितने समय में आपको कितनी पॉलिसी का प्रीमियम करना है यदि आप क्लब मेंबरशिप की प्लानिंग कर रहे हैं तो प्राय सभी कंपनियों में यह अप्रैल से मार्च तक होता है यदि आप एमडीआरटी की बात करते हैं तो यह जनवरी से दिसंबर तक होता है प्लानिंग करना इसलिए जरूरी है कि आपको इससे एक साधन जुटाने हैं इसके हिसाब से आपको प्रयास करना है यदि एक आदमी दो मंजिल भवन बनाना चाहता है तो थोड़े सामान की जरूरत होगी यदि 4 मंजिल बनानी है तो उसके लिए धन और सामान की व्यवस्था करनी है और वैसा ही नक्शा बनाना पड़ेगा यदि भवन और ऊंचा बनाना है तो सारी प्लानिंग बदल जाएगी क्योंकि आपको लिफ्ट भी चाहिए भूकंप रोधी इंतजाम भी चाहिए पानी के लिए बड़ी टंकी चाहिए नीचे बड़ी पार्किंग चाहिए और बहुत सी व्यवस्था चाहिए एक बीमा एजेंट के लिए प्लानिंग की आवश्यकता यह है कि यदि वह साल की 30 40 पॉलिसी भेजता है तो ज्यादा प्लानिंग नहीं चाहिए यदि उसे साल में 200 पॉलिसी बेचनी है तो उसे देखना पड़ेगा कि वह 1 महीने में कितनी पॉलिसी भेज सकता है उसे और ज्यादा बढ़ाने के लिए क्या करना पड़ेगा 200 पॉलिसी के लिए कितने लोगों से मिलना पड़ेगा यह भी अनुमान लगाना पड़ेगा कि पुराने ग्राहकों से कितनी पॉलिसी साल भर में आ सकती है और बाकी के लिए ग्राहक कहां से खोजे जाएंगे इसके लिए वह कहीं स्टाल लगाए किसी कंपनी में जाकर लोगों से बात करें या पुराने ग्राहकों से ही नए फैसले एक एजेंट पहले साल भर में 1000000 का प्रेम करता है इसी बेचता है यदि इस साल 2000000 करना चाहता है तो उसे सोचना होगा कि उसका जो औसत प्रीमियम ₹10000 प्रति पॉलिसी है उसे वह कितना बड़ा सकता है मान ले कि वह ऐसे 12000 तक लेकर जा सकता है अब उसे 2000000 प्रीमियम तक पहुंचने के लिए लगभग 165 पॉलिसी बेचनी होगी 100 की बजाय 165 पॉलिसी बेचने के लिए उसे कहां से नए ग्राहक खोजने पड़ेंगे दूसरे शहर में जाना पड़ेगा नए सर्कल में घोषणा होगा पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों को टटोलना पड़ेगा टेली कॉलिंग करनी पड़ेगी कहीं से डाटा खरीदना पड़ेगा किसी होम लोन के एजेंट सेटिंग करनी पड़ेगी जिससे वे हर लोन लेने वाले को एजेंट से मिलवा सके आदि मंजिल पहले से तय नहीं है तो यात्रा में क्या-क्या चाहिए इसका प्रबंध नहीं हो सकता है 1 साल के लिए तय किए गए लक्ष्य को प्लानिंग नहीं कह सकते जब तक कि उस लक्ष्य को महीनों में नहीं तोड़ा गया यदि आप ने तय किया कि साल में 200 पॉलिसी करनी है तो आपको सोचना पड़ेगा कि आप मार्च में कितनी पॉलिसी भेज पाएंगे फरवरी में कितनी और इस तरह से सीजनल उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए किस महीने में कितनी पॉलिसी आपको बेचनी है फिर आपको इस टारगेट को हफ्तों में तोड़ना है किस महीने के बचे हुए 2 हफ्तों में आपको कितनी कितनी पॉलिसी बेचनी है मान ले कि आपको इस सप्ताह चार पॉलिसी बेचनी है तो आप को कम से कम 12 लोगों से मिलना है इसका अर्थ हुआ कि आपको आज कम से कम 2 लोगों से मिलना ही है यदि टारगेट यानी लक्ष्य को आज तक में नहीं तोड़ा गया तो पूरी प्लानिंग बेमानी है प्लानिंग का उद्देश्य है कि हमें हर रोज पता रहे कि कहां तक पहुंचना है कहां तक पहुंचे हैं और यदि कमी है तो उसे कल कैसे पूरा कर सकते हैं प्लानिंग करते समय ध्यान रहे कि आपको केवल नॉर्मल पॉलिसी के लिए प्लानिंग करनी है यदि आपने पिछले साल एक पॉलिसी ₹200000 प्रीमियम की बेटी जिससे आप की प्रति पॉलिसी प्रीमियम औसत 16000 की हो गई तो आज आप 16000 प्रति पॉलिसी की औसत मान कर प्लानिंग नहीं कर सकते आपको वह बड़ी पॉलिसी जो कि एक अपवाद की तरह थी को हटाकर बाकी की औसत निकालनी होगी और उसी के हिसाब से प्लानिंग करनी होगी आप पूरे दावे से नहीं कह सकते कि इस साल भी आपको एक पॉलिसी में 200000 का प्रीमियम मिलेगा यदि बड़ी पॉलिसी इस साल भी मिल गई तो मान ले कि वह बोनस है पर आप उसके आधार पर प्लानिंग नहीं कर सकते आपको यह भी देखना है कि आप लक्ष्य के पीछे भागे ग्राहक के नहीं इसका अर्थ यह है कि आपको प्लानिंग यह करनी है कि इसमें आपको 10 पॉलिसी बेचनी है यह नहीं कि इस ग्राहक को पॉलिसी बेचनी है कोई भी एजेंट यह चुनौती नहीं ले सकता कि वह जिसे चाहे उसको पॉलिसी पेज ही देगा आपके 50,000 प्रेम का अर्थ सिर्फ 50,000 है चाहे वह किसी भी ग्राहक से आए यदि एक ग्राहक आपको जरूरत से ज्यादा चक्कर लगवा रहा है तो उसे छोड़कर किसी अन्य की तरफ बढ़े
एक से ज्यादा एजेंसी
कुछ एजेंट एक बार में एक से ज्यादा जीवन बीमा कंपनी की एजेंसी लिए रखते हैं मेरा मानना है कि एक एजेंट जब तक कि वह बहुत ही बड़ा एजेंट ना बन जाए उसे एक ही कंपनी की एजेंसी में काम करना चाहिए इसी से ज्यादा कामयाबी की गुंजाइश होती है आप एक ही कंपनी से जुड़े हैं तो जाहिर है कि आपकी सारी ऊर्जा उसी कंपनी के प्लान बेचने में लगी है यदि आप ग्राहक के सामने दो तीन कंपनियों की चॉइस देकर पूछे कि उसे कौन सा प्लान चाहिए तो संभावना है कि वह आपको डाल देगा उसे एक ही पॉलिसी लेनी है और निर्णय के लिए मैं आप पर निर्भर करता है यदि आप कई कंपनियों की पॉलिसी बेच रहे हैं तो आप पूरे विश्वास से नहीं कह सकते कि इस एक कंपनी के प्लान बढ़िया हैं ऐसा करने के लिए आपको अपनी दूसरी कंपनी के प्लान को हल्का बताना पड़ेगा जो कठिन काम होगा यदि आपको किसी समय दूसरी कंपनी की एजेंसी लेने की जरूरत भी लगे तो आपको एक भारतीय जीवन बीमा निगम और एक प्राइवेट कंपनी की ज्वैलरी लेनी चाहिए ऐसा करने से आप उन ग्राहक को संतुष्ट कर पाएंगे जो सरकारी कंपनी की ओर झुकाव रखते हैं और उन्हें भी जो किसी प्राइवेट कंपनी की पॉलिसी खरीदना चाहते हैं बाजार में सभी तरह की सोच के ग्राहक आपको मिलेंगे
जनरल इंश्योरेंस की एजेंसी
जीवन बीमा के साथ हैं जनरल बीमा की एजेंसी एक अच्छा जोड़ बन सकता है यदि आप फुल टाइम बीमा एजेंट है जनरल बीमे में आपको ग्राहक ज्यादा मिल सकते हैं जिन्हें आप बाद में जीवन बीमा में भी उपयोग कर सकते हैं साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि जीवन बीमा की तुलना में साधारण बीमा में क्लेम बहुत ज्यादा होते हैं यदि किसी ग्राहक को क्लेम ना मिले तो वह इसका जिम्मेवार आपको मानते हुए आपसे जीवन बीमा लेना भी बंद कर सकता है।
स्कीम की गणना कैसे करें
बीमा कंपनियां समय-समय पर अपने एजेंटों के लिए स्कीम निकालती रहती है जिसमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा बिजनेस करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है इसमें उन्हें कमीशन के अलावा कुछ पुरस्कार दिए जाते हैं हमें मालूम होना चाहिए उसका उद्देश्य क्या है।
एक उदाहरण लें यदि एक कंपनी अपने एजेंटों के लिए एक स्कीम निकालें कि 1 महीने में एक लाख का प्रीमियम करने पर उन्हें ₹1000 का पुरस्कार मिलेगा तो यह कितने प्रतिशत की स्कीम है हम सबको लगता है कि यह 1% की स्कीम है वास्तव में ऐसा नहीं है यदि एक एजेंट पैनास्किन के इस महीने सिर्फ 10 15000 का ही प्रीमियम करता तो अब वह स्कीम के कारण 100000 का प्रीमियम नहीं कर सकता है एक लाख का प्रीमियम उसी एजेंट के लिए करना संभव होगा जो बिना स्कीम के भी 70000 का बिजनेस करता यदि बीमा कंपनी को यह मालूम हो कि जो एजेंट 70000 का प्रेम करता है वह स्कीम के बावजूद 17000 ही करेगा तो कंपनी उसे कोई भी इनाम नहीं देगी पुरस्कार का उद्देश्य है कि आप 70000 से 100000 तक पहुंचे यानी इनाम सिर्फ उस बिजनेस के लिए है जो आप स्कीम के कारण ज्यादा करेंगे इस उदाहरण में आपको 30000 का ज्यादा बीमा करने पर 1000 की स्कीम मिल रही है। यह स्कीम वास्तव में 1% की ना होकर 3% की है। कि सिर्फ सामान्य से ज्यादा बिजनेस के लिए है।
कितनी बडी पॉलिसी ग्राहक को दें
किसी ग्राहक को उसकी फाइनेंशियल कैपेसिटी से छोटी पॉलिसी देना(बेचना) ग्राहक और एजेंट दोनों के लिए गुनाह है। ग्राहक के लिए तो इसलिए कि उसे जरूरत से छोटी पॉलिसी मिली और आपके लिए नुकसान यह है कि आपको इस पॉलिसी से कमीशन कम मिलेगा। इसी तरह अगर ग्राहक को उसकी क्षमता से बड़ी पॉलिसी बेची गई होती तो नुकसान यह होगा कि पॉलिसी बंद हो सकती है, जो दोनों के लिए ही हानिकारक होगा।
मैंने जब बीमा एजेंसी ली तो एक परिचित के पास भी में के लिए गया उसने बताया कि उसका पॉलिसी खरीदने से का पहला अनुभव बहुत कटु रहा था उसकी किसी पड़ोसी नहीं जैसी ली थी और उसे बीमा के लिए मिला इस भाई ने उससे यह कह दिया कि मैं ₹8000 सालाना की किस्त दे सकता हूं तुम जो भी पॉलिसी ठीक समझते हो कर दो पॉलिसी बन कर आ गई और इसने उठाकर अलमारी में रख दी जब अगले साल कष्ट के लिए कंपनी का नोटिस आया तो वह ₹16000 का था इसने उस एजेंट से बात की तो उसने बताया कि उसने पहले से ही 16000 साल आना की पॉलिसी बनाई थी जिसमें ₹8000 अपनी और से कमीशन के मिलाकर डाल दिए थे ग्राहक 16000 साल आना नहीं दे सकता था तो पॉलिसी बंद हो गई और दोनों का ही नुकसान हुआ इसलिए जरूरी है कि ग्राहक को उसकी क्षमता अनुसार ही पॉलिसी बेची जाए ना जरूरत से कम और ना ज्यादा इसके लिए पहली जरूरत जरूरी बात है वह यह कि आप ग्राहक के सामने ठीक सा इसका उदाहरण लें जब मैंने बीमा एजेंसी ली तो पहले साल में मेरा औसत प्रीमियम था ₹6000 प्रति पॉलिसी मैंने जब विचार किया तो एहसास हुआ कि ग्राहक दे तो ज्यादा भी सकता है परंतु मैं उदाहरण ही एक लाख बीमा धन की पॉलिसी काट लेता हूं ऐसा मैं इसलिए करता था क्योंकि जब मुझे पॉलिसी सिखाई गई थी तो एक लाख के उदाहरण से ही बताई गई थी और मैंने उसी को अपनी आदत बना लिया इसके बाद मैंने 200000 की पॉलिसी का उदाहरण लेना शुरू किया तो बिजनेस पढ़ने लगा अब या तो ग्राहक 200000 की पॉलिसी ले लेता या बोलता कि 12000 की किस्त थोड़ी ज्यादा है इससे औसत प्रीमियम 8 से 9000 के बीच हो गया 2011 2012 के समय के हिसाब से यह राशि कम नहीं थी इसलिए ठीक सा इसका उदाहरण लिए इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक एक लाख की पॉलिसी का उदाहरण देखें और 500000 की पॉलिसी खरीद ल बहुत छोटी पॉलिसी बेच कर आ जाते हैं क्योंकि वे उसकी क्षमता का ठीक से आकलन नहीं कर पाते ग्राहक का सही मूल्यांकन करना बहुत जरूरी है एक भारतीय आदमी जापान में गया वह वहां के एक अत्यधिक प्रसिद्ध वैज्ञानिक की प्रयोगशाला देखने चला जाता है उसने वैज्ञानिक से कहा कि कोई नई चीज दिखाएं वैज्ञानिक ने अपनी मुट्ठी बंद की और बोला बताओ इसमें क्या है उस भारतीय ने आसपास निगाह घुमा कर देखा तो पाया कि कुछ टेलीविजन के मॉडल और फोटोग्राफ रखे थे उसे लगा कि इस जापानी ने कोई छोटी छोटा टीवी बना लिया लगता है जो उसकी मुट्ठी में बंद कर लिया है उसने कहा मुट्ठी में टीवी है वैज्ञानिक बोला बिल्कुल ठीक अब बताओ कितने एमडीआरटी दिल्ली की मीटिंग में एक एजेंट ने बताया कि वह किसी ग्रह के पास गया और उसे अपनी पॉलिसी बताई उसकी बात से संतुष्ट होने पर ग्राहक ने कहा एक लाख की दे दो उस एजेंट है उसे एक लाख की बीमा राशि की पॉलिसी जिसका प्रेम ₹6000 था दे दी पॉलिसी लेने के बाद ग्राहक ने कहा कि वह एक लाख का प्रीमियम देना चाहता था पर एजेंट ने उसकी हैसियत का मूल्यांकन 6000 के प्रीमियम के बराबर ही किया तो उसे इतना ही प्रीमियम दिया सबसे बढ़िया तरीका ग्राहक की क्षमता का अनुमान लगाने का कि आप उससे पूछा कि आपको इस प्लान में लगभग कितनी मेच्योरिटी वैल्यू चाहिए इस बात की संभावना कम है कि कोई ग्राहक आपको यह बोले कि उसे 15 साल के बाद ₹100000 ही चाहिए जब आप प्रेम की बात करते हैं तो उसे लगता है कि यह तो पैसा मांग रहे हैं इसलिए चौकन्ना रहता है जब आप मैच्योरिटी की बात करते हैं तो आप उसे पैसा देने की बात कर रहे हैं इसलिए मैं ज्यादा सहज रहता है ग्राहक आपको बोलता है कि 15 साल के बाद लगभग 1500000 रुपए तो मिलना ही चाहिए अब हम ग्राहक से कहेंगे कि आपने बिल्कुल ठीक अनुमान लगाया 1500000 तो मिलना ही चाहिए यदि आप ₹1000000 की पॉलिसी लेते हैं तो आपको लगभग 1500000 मिलेगा 1000000 के लिए आप की किस्त बनेगी लगभग ₹5000 महीना यदि आप सीधे ₹60000 सालाना की बात करते तो उसके लिए इसे स्वीकार करना कठिन हो सकता था पर अब आप जिस तरीके से समझा रहे हैं यह एक बेहतर तरीका है उसे अपनी बात समझाने का।
कितना रिस्क कवर चाहिए
जब हम ग्राहक से यह कहते हैं कि आपकी पुरानी पॉलिसी आपकी फाइनैंशल प्लानिंग का हिस्सा नहीं है तो ग्राहक हम से कह सकता है कि चलिए अब आप बताएं कि मुझे कितने का बीमा लेना चाहिए आप मेरी फाइनैंशल प्लानिंग करें क्या आप जानते हैं कि किसी आदमी का कितना बीमा होना चाहिए एक प्रोफेशनल तरीके से इसे कैसे जुड़ेंगे अक्सर हमारी ट्रेनिंग क्लास में जब यह सवाल एजेंटों से पूछा जाता है तो एक एजेंट बोलता है सालाना आमदनी का 10 गुना तो दूसरा बोलता है ढाई सौ गुना दोनों एजेंट ठीक नहीं हो सकते हैं इसका अर्थ है कि लोगों की समझ में कहीं ना कहीं कमी है एक सिद्धांत आता है ह्यूमन लाइफ वैल्यू का जिसमें यह गणना की जाती है कि यह आदमी अपने जीवन में कुल कितना धन कम आएगा और इसे उतना ही बीमा देना चाहिए इस सिद्धांत में समस्या यह है कि यह अनुमान लगाना संभव ही नहीं है कि आदमी अगले 20 साल में कितनी तरक्की करेगा कितना सफल होगा कितना कम आएगा इसलिए यह सिद्धांत व्यवहारिक नहीं है दूसरा सिद्धांत है इनकम रिप्लेसमेंट का यानी यह आदमी सालाना कितना कमाता है और इसे उतना ही बीमा दिया जाए जिससे इसके जाने के बाद परिवार का पहले जैसा स्टैंडर्ड ऑफ लिविंग बना रहे यानी उन्हें घर खर्च के लिए पहले जैसी आमदनी उपलब्ध रहे यह ज्यादा व्यवहारिक है क्योंकि इसकी गणना संभव है हम किसी आदमी को उतना ही बीमा देंगे जिससे कि उसके ना रहने पर परिवार को उसकी वर्तमान आमदनी के बराबर मासिक आमदनी मिल सके इसकी गणना इस प्रकार से करेंगे कि सालाना आमदनी का 12 गुना बीमा कर दें यदि एक आदमी साल में तीन तीन लाख कमाता है तो उसे हमें हम 36 लाख का बीमा देंगे अब यदि परिवार का मुखिया चल बसे तो परिवार को 3600000 का जो क्लेम मिलेगा उसे किसी भी सुरक्षित जगह पर जमा करवाने से जहां 8% का ब्याज मिले तीन लाख सालाना की आमदनी हो जाएगी इससे परिवार को वह सब साधन मिलते रहेंगे जो आज मिल रहे हैं यदि परिवार पर कोई कर्ज है जैसे मकान या कार का लोन तो उसे भी 3600000 में जोड़ देंगे ताकि उसे चुकाने के बाद परिवार 3600000 निवेश कर सके कहा तो यह जाता है कि सालाना आमदनी में से ग्राहक का व्यक्तिगत खर्च जैसे सिगरेट शराब आदि घटाकर उसका 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि ग्राहक के जाने के बाद इस खर्च की जरूरत नहीं होगी मेरा मानना यह है कि हमें व्यक्तिगत खर्च घटाएं बिना ही 12 गुणा करना चाहिए क्योंकि घर खर्च हर साल बढ़ता रहेगा जबकि ब्याज से होने वाली आमदनी स्थिर रहेगी इसलिए थोड़ा ज्यादा बीमा क्लेम ही चाहिए यदि ग्राहक अपनी आमदनी बताने को राजी ना हो तो हम उससे उसका मासिक खर्च पूछेंगे जो कि ग्राहक आसानी से बता देता है ऐसी अवस्था में हम आमदनी का 12 गुणा करके खर्च का 12 गुना करेंगे इस प्रकार जोरासी निकले उसमें सारे कर्ज को जोड़ दें तो यह बीमा राशि यार इस कवर की राशि निकल आएगी जो ग्राहक को लेना चाहिए इसे एक उदाहरण से ठीक समझ पाएंगे यदि किसी ग्रह की सालाना खर्च रुपए है तो उसे कितना रिस्क कवर देंगे इस चार लाख की रकम को हम 12 से गुना करेंगे यानी 4800000 का कवर देंगे जिससे आने की स्थिति में परिवार को 8% की दर से ₹400000 सालाना का ब्याज मिल सके अब यदि उसके ऊपर 500000 का कर्ज है तो उसे इस 4800000 में जोड़ देंगे यानी 53 लाख का बीमा देंगे यदि क्लेम आया तो लोन चुकाने के बाद परिवार के पास 4800000 ही बचेंगे यदि उसके पास पहले से ही 300000 की सुरक्षित सेविंग है तो उस रकम को 53 लाख से घटा देंगे यानी 50 लाख का रिस्क कवर चाहिए।
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