बिजनेस की प्लानिंग

एजेंट सामान्य था अकेले काम करता है उसे यह अंदाजा नहीं होता कि कंपनियों में किस तरह से बिजनेस प्लैनिंग की जाती है इसीलिए अक्सर बीमा एजेंट अपने बीमा की प्लानिंग नहीं करते प्लानिंग यह तय करने के लिए होती है कि हमें कहां तक पहुंचना है कब तक पहुंचना है और कैसे पहुंचना है एक बीमा एजेंट के लिए जरूरी है कि वह तय करेगी उसे कहां तक पहुंचना है यानी वह अपना लक्ष्य निर्धारित करें लक्ष्य इस प्रकार से हो सकता है कि उसे 1 वर्ष में 100 पॉलिसी बेचनी है या 20 लाख का प्रीमियम करना है या अमुक क्लब के लिए क्वालीफाई करना है या एमडीआरटी करना है कहने का अर्थ यह है कि आपको यह तय करना है कि कितने समय में आपको कितनी पॉलिसी का प्रीमियम करना है यदि आप क्लब मेंबरशिप की प्लानिंग कर रहे हैं तो प्राय सभी कंपनियों में यह अप्रैल से मार्च तक होता है यदि आप एमडीआरटी की बात करते हैं तो यह जनवरी से दिसंबर तक होता है प्लानिंग करना इसलिए जरूरी है कि आपको इससे एक साधन जुटाने हैं इसके हिसाब से आपको प्रयास करना है यदि एक आदमी दो मंजिल भवन बनाना चाहता है तो थोड़े सामान की जरूरत होगी यदि 4 मंजिल बनानी है तो उसके लिए धन और सामान की व्यवस्था करनी है और वैसा ही नक्शा बनाना पड़ेगा यदि भवन और ऊंचा बनाना है तो सारी प्लानिंग बदल जाएगी क्योंकि आपको लिफ्ट भी चाहिए भूकंप रोधी इंतजाम भी चाहिए पानी के लिए बड़ी टंकी चाहिए नीचे बड़ी पार्किंग चाहिए और बहुत सी व्यवस्था चाहिए एक बीमा एजेंट के लिए प्लानिंग की आवश्यकता यह है कि यदि वह साल की 30 40 पॉलिसी भेजता है तो ज्यादा प्लानिंग नहीं चाहिए यदि उसे साल में 200 पॉलिसी बेचनी है तो उसे देखना पड़ेगा कि वह 1 महीने में कितनी पॉलिसी भेज सकता है उसे और ज्यादा बढ़ाने के लिए क्या करना पड़ेगा 200 पॉलिसी के लिए कितने लोगों से मिलना पड़ेगा यह भी अनुमान लगाना पड़ेगा कि पुराने ग्राहकों से कितनी पॉलिसी साल भर में आ सकती है और बाकी के लिए ग्राहक कहां से खोजे जाएंगे इसके लिए वह कहीं स्टाल लगाए किसी कंपनी में जाकर लोगों से बात करें या पुराने ग्राहकों से ही नए फैसले एक एजेंट पहले साल भर में 1000000 का प्रेम करता है इसी बेचता है यदि इस साल 2000000 करना चाहता है तो उसे सोचना होगा कि उसका जो औसत प्रीमियम ₹10000 प्रति पॉलिसी है उसे वह कितना बड़ा सकता है मान ले कि वह ऐसे 12000 तक लेकर जा सकता है अब उसे 2000000 प्रीमियम तक पहुंचने के लिए लगभग 165 पॉलिसी बेचनी होगी 100 की बजाय 165 पॉलिसी बेचने के लिए उसे कहां से नए ग्राहक खोजने पड़ेंगे दूसरे शहर में जाना पड़ेगा नए सर्कल में घोषणा होगा पुराने दोस्तों और रिश्तेदारों को टटोलना पड़ेगा टेली कॉलिंग करनी पड़ेगी कहीं से डाटा खरीदना पड़ेगा किसी होम लोन के एजेंट सेटिंग करनी पड़ेगी जिससे वे हर लोन लेने वाले को एजेंट से मिलवा सके आदि मंजिल पहले से तय नहीं है तो यात्रा में क्या-क्या चाहिए इसका प्रबंध नहीं हो सकता है 1 साल के लिए तय किए गए लक्ष्य को प्लानिंग नहीं कह सकते जब तक कि उस लक्ष्य को महीनों में नहीं तोड़ा गया यदि आप ने तय किया कि साल में 200 पॉलिसी करनी है तो आपको सोचना पड़ेगा कि आप मार्च में कितनी पॉलिसी भेज पाएंगे फरवरी में कितनी और इस तरह से सीजनल उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखते हुए किस महीने में कितनी पॉलिसी आपको बेचनी है फिर आपको इस टारगेट को हफ्तों में तोड़ना है किस महीने के बचे हुए 2 हफ्तों में आपको कितनी कितनी पॉलिसी बेचनी है मान ले कि आपको इस सप्ताह चार पॉलिसी बेचनी है तो आप को कम से कम 12 लोगों से मिलना है इसका अर्थ हुआ कि आपको आज कम से कम 2 लोगों से मिलना ही है यदि टारगेट यानी लक्ष्य को आज तक में नहीं तोड़ा गया तो पूरी प्लानिंग बेमानी है प्लानिंग का उद्देश्य है कि हमें हर रोज पता रहे कि कहां तक पहुंचना है कहां तक पहुंचे हैं और यदि कमी है तो उसे कल कैसे पूरा कर सकते हैं प्लानिंग करते समय ध्यान रहे कि आपको केवल नॉर्मल पॉलिसी के लिए प्लानिंग करनी है यदि आपने पिछले साल एक पॉलिसी ₹200000 प्रीमियम की बेटी जिससे आप की प्रति पॉलिसी प्रीमियम औसत 16000 की हो गई तो आज आप 16000 प्रति पॉलिसी की औसत मान कर प्लानिंग नहीं कर सकते आपको वह बड़ी पॉलिसी जो कि एक अपवाद की तरह थी को हटाकर बाकी की औसत निकालनी होगी और उसी के हिसाब से प्लानिंग करनी होगी आप पूरे दावे से नहीं कह सकते कि इस साल भी आपको एक पॉलिसी में 200000 का प्रीमियम मिलेगा यदि बड़ी पॉलिसी इस साल भी मिल गई तो मान ले कि वह बोनस है पर आप उसके आधार पर प्लानिंग नहीं कर सकते आपको यह भी देखना है कि आप लक्ष्य के पीछे भागे ग्राहक के नहीं इसका अर्थ यह है कि आपको प्लानिंग यह करनी है कि इसमें आपको 10 पॉलिसी बेचनी है यह नहीं कि इस ग्राहक को पॉलिसी बेचनी है कोई भी एजेंट यह चुनौती नहीं ले सकता कि वह जिसे चाहे उसको पॉलिसी पेज ही देगा आपके 50,000 प्रेम का अर्थ सिर्फ 50,000 है चाहे वह किसी भी ग्राहक से आए यदि एक ग्राहक आपको जरूरत से ज्यादा चक्कर लगवा रहा है तो उसे छोड़कर किसी अन्य की तरफ बढ़े

एक से ज्यादा एजेंसी

कुछ एजेंट एक बार में एक से ज्यादा जीवन बीमा कंपनी की एजेंसी लिए रखते हैं मेरा मानना है कि एक एजेंट जब तक कि वह बहुत ही बड़ा एजेंट ना बन जाए उसे एक ही कंपनी की एजेंसी में काम करना चाहिए इसी से ज्यादा कामयाबी की गुंजाइश होती है आप एक ही कंपनी से जुड़े हैं तो जाहिर है कि आपकी सारी ऊर्जा उसी कंपनी के प्लान बेचने में लगी है यदि आप ग्राहक के सामने दो तीन कंपनियों की चॉइस देकर पूछे कि उसे कौन सा प्लान चाहिए तो संभावना है कि वह आपको डाल देगा उसे एक ही पॉलिसी लेनी है और निर्णय के लिए मैं आप पर निर्भर करता है यदि आप कई कंपनियों की पॉलिसी बेच रहे हैं तो आप पूरे विश्वास से नहीं कह सकते कि इस एक कंपनी के प्लान बढ़िया हैं ऐसा करने के लिए आपको अपनी दूसरी कंपनी के प्लान को हल्का बताना पड़ेगा जो कठिन काम होगा यदि आपको किसी समय दूसरी कंपनी की एजेंसी लेने की जरूरत भी लगे तो आपको एक भारतीय जीवन बीमा निगम और एक प्राइवेट कंपनी की ज्वैलरी लेनी चाहिए ऐसा करने से आप उन ग्राहक को संतुष्ट कर पाएंगे जो सरकारी कंपनी की ओर झुकाव रखते हैं और उन्हें भी जो किसी प्राइवेट कंपनी की पॉलिसी खरीदना चाहते हैं बाजार में सभी तरह की सोच के ग्राहक आपको मिलेंगे

जनरल इंश्योरेंस की एजेंसी

जीवन बीमा के साथ हैं जनरल बीमा की एजेंसी एक अच्छा जोड़ बन सकता है यदि आप फुल टाइम बीमा एजेंट है जनरल बीमे में आपको ग्राहक ज्यादा मिल सकते हैं जिन्हें आप बाद में जीवन बीमा में भी उपयोग कर सकते हैं साथ ही आपको यह भी ध्यान रखना होगा कि जीवन बीमा की तुलना में साधारण बीमा में क्लेम बहुत ज्यादा होते हैं यदि किसी ग्राहक को क्लेम ना मिले तो वह इसका जिम्मेवार आपको मानते हुए आपसे जीवन बीमा लेना भी बंद कर सकता है।

स्कीम की गणना कैसे करें

बीमा कंपनियां समय-समय पर अपने एजेंटों के लिए स्कीम निकालती रहती है जिसमें उन्हें ज्यादा से ज्यादा बिजनेस करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है इसमें उन्हें कमीशन के अलावा कुछ पुरस्कार दिए जाते हैं हमें मालूम होना चाहिए उसका उद्देश्य क्या है। 

एक उदाहरण लें यदि एक कंपनी अपने एजेंटों के लिए एक स्कीम निकालें कि 1 महीने में एक लाख का प्रीमियम करने पर उन्हें ₹1000 का पुरस्कार मिलेगा तो यह कितने प्रतिशत की स्कीम है हम सबको लगता है कि यह 1% की स्कीम है वास्तव में ऐसा नहीं है यदि एक एजेंट पैनास्किन के इस महीने सिर्फ 10 15000 का ही प्रीमियम करता तो अब वह स्कीम के कारण 100000 का प्रीमियम नहीं कर सकता है एक लाख का प्रीमियम उसी एजेंट के लिए करना संभव होगा जो बिना स्कीम के भी 70000 का बिजनेस करता यदि बीमा कंपनी को यह मालूम हो कि जो एजेंट 70000 का प्रेम करता है वह स्कीम के बावजूद 17000 ही करेगा तो कंपनी उसे कोई भी इनाम नहीं देगी पुरस्कार का उद्देश्य है कि आप 70000 से 100000 तक पहुंचे यानी इनाम सिर्फ उस बिजनेस के लिए है जो आप स्कीम के कारण ज्यादा करेंगे इस उदाहरण में आपको 30000 का ज्यादा बीमा करने पर 1000 की स्कीम मिल रही है। यह स्कीम वास्तव में 1% की ना होकर 3% की है। कि सिर्फ सामान्य से ज्यादा बिजनेस के लिए है।


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