क्या आप सबसे अच्छी स्थिति मे हैं?

जब एजेंट के हाथ से कोई पॉलिसी छूट जाती है तो उसे लगता है कि उसकी कंपनियां उसकी पॉलिसी में ही कोई कमी है उसे लगता है कि उसकी कंपनी से बेहतर दूसरी कंपनी है जिसका नाम ज्यादा बिकता है किसी को लगता है दूसरी कंपनियों के प्लान उसके प्लान से ज्यादा बेहतर है या कमीशन बेहतर है या पुरस्कार राशि से बेहतर है या कुछ और खुफिया उनमें है जो उसके पास नहीं है कोई भी कंपनी पूर्ण नहीं होती है जिसमें कोई कमी नहीं निकाली जा सके हर कंपनी की अपनी ताकत और कमजोरी होती है कोई भी कंपनी तभी पूर्ण कही जा सकती है जब उसके बारे में ग्राहक किसी भी प्रकार का सवाल ना उठा सके यदि ऐसा हो जाए तो पूरे देश के लोग उसी कंपनी से पॉलिसी लेंगे और सारी प्रतिस्पर्धा समाप्त हो जाएगी ऐसा होना संभव ही नहीं है ऐसे ही कोई प्लान इतना पूर्ण हो कि कोई ग्राहक उसके बारे में कोई प्रश्न ही नहीं बचे तो वह स्थिति सेल्समैन के लिए सर्वश्रेष्ठ होगी क्योंकि पूरा कंपटीशन समाप्त हो जाएगा इसका मतलब बाकी सब प्लान बंद पर यह संभव नहीं है एक क्षण के लिए मान ले कि ऐसी स्थिति आ गई कि आपकी कंपनी पूर्ण हो गई आपके प्लान भी पूर्ण हो गए और आपके प्लान में रिटर्न 20 सबसे ज्यादा हो गया वह स्थिति आ गई जब आप जिस के पास जाएंगे उसे पॉलिसी लेनी ही पड़ेगी क्योंकि ग्राहक के पास कोई विकल्प है ही नहीं ऐसा भी हो सकता है कि आपको लोगों के पास जाना ही ना पड़े और लोग खुद आपके पास लेने के लिए आ रहे हो क्या आपको लगता है कि आपके यह स्थिति सबसे बेहतर है यदि आपको ऐसा लगता है तो यह एक भ्रम है यदि ऐसा हो गया तो क्या आपकी एजेंसी बचेगी जब कंपनी सबसे बढ़िया हो गई प्लान सबसे बढ़िया हो गए लोग लाइन लगाकर खरीदने के लिए आ रहे हैं सारा कंपटीशन समाप्त हो गया तो फिर एजेंट की क्या जरूरत होगी एजेंट की जरूरत किसी भी माल को बेचने के लिए तभी तक है जब तक ग्राहक को उसके लिए समझाने की जरूरत है इन चीजों के बारे में समझाने की जरूरत नहीं होती उनके लिए एजेंट नहीं कुछ थोड़ी तनख्वाह वाले एग्जीक्यूटिव होते हैं क्या कभी बिजली विभाग से कोई आपके पास आता है कनेक्शन के बारे में समझा कर बेचने के लिए क्या कमी जल विभाग के एजेंट आते हैं आपको जल के फायदे समझाने के लिए क्या कभी आप रेल के टिकट बेचने वाला बाबू आपको डिस्काउंट ऑफर करता है और क्या आपको लगता है कि बिजली जलिया रेल का कोई बाबू इतना कमाता है जितना एक बीमा एजेंट कमाता है यदि जीवन बीमा ऐसे ही दिखने लगा तो सब की एजेंसी गई समझो और यदि लोगों को ऐसी स्थिति आने के बाद भी कोई कंपनी एजेंट को रखें तो किन्हे एजेंसी देगा सबसे बढ़िया कंपनी सबसे बढ़िया एजेंट को ही रखेगी क्या आपको लगता है कि आप देश के सबसे बढ़िया एजेंट्स में से एक हैं कंपनी तब यह नियम भी बना सकती है कि वही आदमी एजेंट बनेगा जो एमबीए है या 2 साल का बीमा का कोर्स करके आया है जो कंपटीशन वाली एक परीक्षा पास करेगा फुल टाइम यही काम करेगा या जो ₹200000 के सिक्योरिटी देने को तैयार है आप पता करके देखें कि मारुति या दूसरी बड़ी कार कंपनी अपनी एजेंसी किन लोगों को देती है और किन किन शर्तों पर देती है माल जितनी आसानी से बिकता है एजेंसी उतनी ही मुश्किल से मिलती है इसका अर्थ यही है कि आपका और आपकी कंपनी का एक आदर्श रिश्ता है आप चाहे तो कम अपनी कंपनी के प्लान में बहुत सारी कमियां निकाल सकते हैं और कंपनी चाहे तो आपके काम में उससे भी ज्यादा कमियां निकाल सकती है बेहतर यही है कि आप इस सच्चाई को स्वीकार करें कि ग्राहक से मिलने वाली ना मैं आप का आपकी पॉलिसी का और आपकी कंपनी का तीनों का ही योगदान है आप किसी भी अन्य कंपनी के साथ जुड़े होते तो भी आप ऐसी ही दिक्कतें झेल रहे होते क्योंकि कोई भी कंपनी या प्लान पूर्ण हो ही नहीं सकते

प्रीमियम कैसे बढ़ाएं?

आपके दो या तीन बार ग्राहक के पास जाने के बाद जब यह पॉलिसी के लिए तैयार हो गया और फार्म भरकर चेक काट रहा है उस समय हम ग्राहक से पॉलिसी का साइज कैसे बढ़ा सकते हैं इसकी चर्चा यहां करेंगे एक बात तो तय है कि ग्राहक जितना पैसा बचाता है और जितना वह निवेश कर सकता है वह सारा जीवन बीमा में नहीं देता है यदि वह सारी बचत हमें देता तो फिर प्रीमियम बढ़ाने की बात ही नहीं होती सामान्यता ग्राहक पूरी बचत का 25 से 30% ही देता है इसलिए क्रिस्ट बढ़ाने की पूरी संभावना रहती है 15 से 20% तक कृष्ण आसानी से बढ़ाई जा सकती है इतनी किस्त बढ़ाने का मतलब है उतने ही प्रयास में 15 से 20% आपकी आमदनी बढ़ना पहला प्रयास तो हम इस दिशा में यह करेंगे कि ग्राहक से पूछेंगे कि मासिक किस्त कितनी हो जाए जाहिर सी बात है कि ग्राहक आपसे कहेगा कि उसे तो मासिक नहीं सालाना या छमाही किस्त देनी है हम उससे कहेंगे की किस्त चाहे कैसे भी दे पर महीने की लागत का तो पता चले होता यह है कि जब आप सालाना या छमाही किसकी बात करते हैं तो ग्राहक एक छोटी राशि की ही बात करता है जिसका उसकी आमदनी से कोई संबंध नहीं होता जब यह महीने की लागत के बारे में सोचता है तो वह अपनी आय की तुलना में उस राशि से करता है जो वह दे सकता है इसलिए यदि वह महीने के हिसाब से किस्त बताएगा तो उस राशि की तुलना में बड़ी रकम की बात ही करेगा जो है सालाना बताने में देता अब आप इस रकम को अपने पक्ष में राउंड ऑफ करेंगे राउंड ऑफ का अर्थ है किनारों को ठोक पीटकर गोल करना यदि ग्राहक आपसे कहे कि मुझे डेढ़ हजार रुपए महीना देना है तो हम उस से कहेंगे कि इसका मतलब हुआ ₹18000 सालाना जो आपके लिए याद रखने में मुश्किल होगा इससे हम सीधा 20,000 रखते हैं ना इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक इसके लिए मना करेगा क्योंकि यदि ई वह 18000 दे सकता है तो साल का 20,000 भी बिना किसी तकलीफ के दे सकता है।
यह तो हुआ राउंडअप करना अपने पक्ष में राउंड आफ का मतलब इससे एक कदम और आगे हैं एक घटना मुझे याद आ रही है मैं जब mb&f में पढ़ता था जो हमारा पहला क्लास टेस्ट हुआ जिसमें अधिकतम अंक थे 15 यानी साडे सात सात अंक के 2 प्रश्न पास अंक थे 15 मैसेज 7:30 जब प्रश्नपत्र जांचे जाने के बाद हमें मिले तो सब छात्र एक दूसरे से पूछ रहे थे उसके अंक एक सहपाठी से जब हमने उसके अंक पूछे तो वह बोला लॉजिकली फर्स्ट डिवीजन है अब यह बात थोड़ी कन्फ्यूजन करने वाली थी फर्स्ट डिवीजन तो ठीक है पर यह लॉजिक क्या है वह बोला मैंने एक ही प्रश्न का उत्तर लिखा था जिसमें साडे चार अंक आए हैं 7:30 में से 4:30 यानी प्रथम श्रेणी लेकिन वास्तव में देखें तो श्रीमान जी फेल थे आज वैसे पार्टी एक बहुत बड़ी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर हैं हमें ऐसे लॉजिक भी आने चाहिए यदि ग्राहक आपसे कहे कि मुझे ₹5000 तिमाही देने हैं या 20000 साल आना देने हैं तो यह अपने आप में एक राउंड फिगर है अब हम ग्राहक से कहेंगे कि 20000 सालाना का मतलब है ₹1 महीना यह रकम आपके याद रखने के लिए कठिन होगी तो आप सीधा सा हिसाब रखें कि ₹2000 महीना ऐसा करने से सालाना प्रीमियम 24000 हो गया जो आपको 20% ज्यादा आमदनी देगा यदि आप ट्रेडिशनल प्लान बेच रहे हैं तो आप बीमा राशि और प्रीमियम के बीच के संबंध बनाकर भी पॉलिसी का साइज बढ़ा सकते हैं मान ले कि ग्राहक कहता है कि उसे ₹200000 की पॉलिसी चाहिए जिसका प्रीमियम आपने देखकर बताया कि ₹12614 है आप ग्राहक से कहीं कि यह रकम याद रखने मुश्किल होगी तो आप इसे सीधा ₹15000 कर दें ऐसा करने से आप की बीमा राशि 235000 हो जाएगी लेकिन उससे आपको और ग्राहक को कोई फर्क नहीं पड़ता यदि ग्राहक खुद ही आपसे कहे कि इस पॉलिसी का प्रीमियम ₹15000 कर दे तो आप उसे बताएं कि इससे बीमा राशि बिगड़ जाएगी तो बेहतर है ढाई लाख की बीमा राशि के हिसाब से पॉलिसी बनाई जो याद रखने में आसान रहे आपको यह देखना है कि पॉलिसी का साइज किस तरह से बढ़ सकता है एक बार पॉलिसी जारी होने के बाद किसी को याद रखने की जरूरत नहीं है कि बीमा राशि कितनी थी और किस्त कितनी यह सब चीजें लिखित में रहेंगी या किस टू होने पर कंपनी के नोटिस से आप दोनों को पता चल जाएंगी

एक महत्वपूर्ण टूल

ग्राहक से कैसे मिलें?

जब ग्राहक के साथ कोई दूसरा एजेंट बैठा हो!

ग्राहक के साथ पहला एक मिनट

आपको क्या क्या बेचना है!

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