यह तो हुआ राउंडअप करना अपने पक्ष में राउंड आफ का मतलब इससे एक कदम और आगे हैं एक घटना मुझे याद आ रही है मैं जब mb&f में पढ़ता था जो हमारा पहला क्लास टेस्ट हुआ जिसमें अधिकतम अंक थे 15 यानी साडे सात सात अंक के 2 प्रश्न पास अंक थे 15 मैसेज 7:30 जब प्रश्नपत्र जांचे जाने के बाद हमें मिले तो सब छात्र एक दूसरे से पूछ रहे थे उसके अंक एक सहपाठी से जब हमने उसके अंक पूछे तो वह बोला लॉजिकली फर्स्ट डिवीजन है अब यह बात थोड़ी कन्फ्यूजन करने वाली थी फर्स्ट डिवीजन तो ठीक है पर यह लॉजिक क्या है वह बोला मैंने एक ही प्रश्न का उत्तर लिखा था जिसमें साडे चार अंक आए हैं 7:30 में से 4:30 यानी प्रथम श्रेणी लेकिन वास्तव में देखें तो श्रीमान जी फेल थे आज वैसे पार्टी एक बहुत बड़ी कंपनी में जनरल मैनेजर के पद पर हैं हमें ऐसे लॉजिक भी आने चाहिए यदि ग्राहक आपसे कहे कि मुझे ₹5000 तिमाही देने हैं या 20000 साल आना देने हैं तो यह अपने आप में एक राउंड फिगर है अब हम ग्राहक से कहेंगे कि 20000 सालाना का मतलब है ₹1 महीना यह रकम आपके याद रखने के लिए कठिन होगी तो आप सीधा सा हिसाब रखें कि ₹2000 महीना ऐसा करने से सालाना प्रीमियम 24000 हो गया जो आपको 20% ज्यादा आमदनी देगा यदि आप ट्रेडिशनल प्लान बेच रहे हैं तो आप बीमा राशि और प्रीमियम के बीच के संबंध बनाकर भी पॉलिसी का साइज बढ़ा सकते हैं मान ले कि ग्राहक कहता है कि उसे ₹200000 की पॉलिसी चाहिए जिसका प्रीमियम आपने देखकर बताया कि ₹12614 है आप ग्राहक से कहीं कि यह रकम याद रखने मुश्किल होगी तो आप इसे सीधा ₹15000 कर दें ऐसा करने से आप की बीमा राशि 235000 हो जाएगी लेकिन उससे आपको और ग्राहक को कोई फर्क नहीं पड़ता यदि ग्राहक खुद ही आपसे कहे कि इस पॉलिसी का प्रीमियम ₹15000 कर दे तो आप उसे बताएं कि इससे बीमा राशि बिगड़ जाएगी तो बेहतर है ढाई लाख की बीमा राशि के हिसाब से पॉलिसी बनाई जो याद रखने में आसान रहे आपको यह देखना है कि पॉलिसी का साइज किस तरह से बढ़ सकता है एक बार पॉलिसी जारी होने के बाद किसी को याद रखने की जरूरत नहीं है कि बीमा राशि कितनी थी और किस्त कितनी यह सब चीजें लिखित में रहेंगी या किस टू होने पर कंपनी के नोटिस से आप दोनों को पता चल जाएंगी
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प्रीमियम कैसे बढ़ाएं?
आपके दो या तीन बार ग्राहक के पास जाने के बाद जब यह पॉलिसी के लिए तैयार हो गया और फार्म भरकर चेक काट रहा है उस समय हम ग्राहक से पॉलिसी का साइज कैसे बढ़ा सकते हैं इसकी चर्चा यहां करेंगे एक बात तो तय है कि ग्राहक जितना पैसा बचाता है और जितना वह निवेश कर सकता है वह सारा जीवन बीमा में नहीं देता है यदि वह सारी बचत हमें देता तो फिर प्रीमियम बढ़ाने की बात ही नहीं होती सामान्यता ग्राहक पूरी बचत का 25 से 30% ही देता है इसलिए क्रिस्ट बढ़ाने की पूरी संभावना रहती है 15 से 20% तक कृष्ण आसानी से बढ़ाई जा सकती है इतनी किस्त बढ़ाने का मतलब है उतने ही प्रयास में 15 से 20% आपकी आमदनी बढ़ना पहला प्रयास तो हम इस दिशा में यह करेंगे कि ग्राहक से पूछेंगे कि मासिक किस्त कितनी हो जाए जाहिर सी बात है कि ग्राहक आपसे कहेगा कि उसे तो मासिक नहीं सालाना या छमाही किस्त देनी है हम उससे कहेंगे की किस्त चाहे कैसे भी दे पर महीने की लागत का तो पता चले होता यह है कि जब आप सालाना या छमाही किसकी बात करते हैं तो ग्राहक एक छोटी राशि की ही बात करता है जिसका उसकी आमदनी से कोई संबंध नहीं होता जब यह महीने की लागत के बारे में सोचता है तो वह अपनी आय की तुलना में उस राशि से करता है जो वह दे सकता है इसलिए यदि वह महीने के हिसाब से किस्त बताएगा तो उस राशि की तुलना में बड़ी रकम की बात ही करेगा जो है सालाना बताने में देता अब आप इस रकम को अपने पक्ष में राउंड ऑफ करेंगे राउंड ऑफ का अर्थ है किनारों को ठोक पीटकर गोल करना यदि ग्राहक आपसे कहे कि मुझे डेढ़ हजार रुपए महीना देना है तो हम उस से कहेंगे कि इसका मतलब हुआ ₹18000 सालाना जो आपके लिए याद रखने में मुश्किल होगा इससे हम सीधा 20,000 रखते हैं ना इस बात की संभावना कम है कि ग्राहक इसके लिए मना करेगा क्योंकि यदि ई वह 18000 दे सकता है तो साल का 20,000 भी बिना किसी तकलीफ के दे सकता है।
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