नई पॉलिसी के लिए ग्राहक से कब मिलें!

नई पॉलिसी के लिए ग्राहक से कब मिलें! 

प्रायः नई पॉलिसी के लिए हम ग्राहक से तभी मिलते हैं जब पुरानी पॉलिसी की किस्ट लेनी होती है यह सही है लेकिन पर्याप्त नहीं है किसी ग्राहक के लिए पुरानी किस्त देते समय नई किस्त भ यदि ग्राहक की उम्र 40 से ज्यादा है तो हर बरस उसके लिए पॉलिसी खरीदना ज्यादा महंगा होता जाएगा 50 की उम्र है तो सालाना प्रीमियम और तेजी से बढ़ेगा दूसरे यदि हम जानते हैं कि ग्राहक की पुरानी पॉलिसी की मैच्योरिटी हो रही है तो हम उसे सुझाव दे सकते हैं कि उस पॉलिसी के बदले में उसे नई पॉलिसी तो लेनी ही चाहिए यदि 20 साल पुरानी पॉलिसी मैच्योर हो रही है तो नई पॉलिसी स्वाभाविक रूप से उससे बड़ी रकम की ही होगी तीसरा ग्राहक के परिवार में लड़के की शादी के बाद बहुत से व्यापारिक लोग घर में सभी सदस्यों की इनकम टैक्स की फाइल बनाकर रखते हैं जब नई बहू घर में आई है तो शादी के कुछ समय बाद भी उसकी फाइल भी बनाएंगे फाइल बनाने का मतलब है कि उस में इनकम टैक्स की प्लानिंग भी होगी और जीवन बीमा की जरूरत भी पड़ेगी चौथा तरीका हो सकता है परिवार में बच्चे के जन्म के बाद पहले कुछ महीनों में बच्चे के नाम का काफी रुपए कट्ठा हो जाता है इस पैसे को हम सेविंग के तरीके से जीवन बीमा में लगवा सकते हैं ध्यान रहे कि बच्चे की पॉलिसी देते समय रिस्क कवर की बात ना करें। यदि घर में लड़की पैदा हुई है तो लोग बचत की ज्यादा जरूरत महसूस करने लगते हैं कभी ऐसे ही बिना किसी विशेष अवसर के भी आप ग्राहक के यहां जा सकते हैं बीमे की बात करने के लिए।

ग्राहक से कहां मिलें?

ग्राहक से हमें कहां मिलना है यह प्रायः वही तय करता है हमें उसी स्थान पर मिलना है जो उसके लिए सुविधाजनक हो फिर भी यदि संभव हो हमारे सामने विकल्प तो हो तो हमें ग्राहक से उसे घर पर ही मिलना चाहिए ग्राहक यदि दुकान दफ्तर होटल में मिलता है तो वहां लोगों का आवागमन बहुत रहता है एक तो ग्राहक की एकाग्रता बार-बार टूटती है दूसरे यह भी हो सकता है कि आप पॉलिसी बता रहे हैं और कोई खामखा सिंह आ गया कि कौन सी पॉलिसी ले रहे हो इससे तो फला कंपनी की पॉलिसी बेहतर है या मेरा एजेंट इससे ज्यादा डिस्काउंट देता है ध्यान रहे कि ग्राहक को पॉलिसी के लिए तैयार करने में महीनों लग सकते हैं पर उसे बिगाड़ने के लिए सिर्फ एक वाक्य ही पर्याप्त है उसी वाक्य से बचने के लिए प्रयास करें कि ग्राहक से उसे घर पर ही मिले जब आप उसके घर पर मिल रहे हो तो वहां दूसरे लोग नहीं आ सकते बस किसी का फोन आ सकता है अब क्योंकि फोन करने वाले को आप दिखाई नहीं दे रहे हो तो आपके बारे में बात होने की संभावना कम है घर पर मिलने में एक लाभ यह भी है कि यदि वह पॉलिसी खरीदने का निर्णय कर ले तो उसके सभी कागज जैसे जन्मतिथि का प्रमाण पत्र फोटो चेक बुक आदि भी वही मिलने की संभावना है। 
जब आप ग्राहक के घर पर बैठ कर बात कर रहे हैं तो आपको शब्दों का प्रयोग सावधानी से करने की जरूरत है। जब उसके बीवी-बच्चे वही आस पास हो तो आप पॉलिसी समझाने के लिए इस तरह के वाक्य प्रयोग नहीं कर सकते कि 'यदि आप मर गए तो परिवार को इतना पैसा मिलेगा'। वहां आपको ज्यादा संवेदनशील होकर बात करने की जरूरत है।

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